दिल्ली में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए सरकार बनाएगी 'शैडो रोड्स' नेटवर्क
दिल्ली में पैदल चलने वालों की मौतें कम करने के लिए सरकार 'शैडो रोड्स' नेटवर्क ला रही है, जिससे पार्क और ग्रीन स्पेस आपस में जुड़ेंगे।

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए अब सफर सुरक्षित और आसान होने वाला है। भारतीय सरकार शहर में दिल्ली शैडो रोड्स नेटवर्क विकसित करने की योजना बना रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पार्कों और हरे-भरे इलाकों को सुरक्षित पैदल रास्तों से जोड़ना है, ताकि लोगों को भारी ट्रैफिक वाली मुख्य सड़कों पर चलने की जरूरत न पड़े।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई एक हालिया बैठक में इस गंभीर विषय पर चर्चा की गई। दरअसल, दिल्ली में पैदल चलने वालों की मौतों के आंकड़े डराने वाले हैं। साल 2024 में जहां 584 लोगों की जान गई थी, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 649 हो गई है। इसी खतरे को कम करने और लोगों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए यह नया नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
'वॉक टू वर्क' फिलॉसफी और मास्टर प्लान 2047
यह पूरी परियोजना 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' का एक अहम हिस्सा है, जो 'वॉक टू वर्क' (पैदल काम पर जाना) की सोच पर आधारित है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के अनुरूप भी है, जिसमें फुटपाथों पर चलने के अधिकार को एक मौलिक अधिकार माना गया है।
इस योजना की खास बातें इस प्रकार हैं:
- यह नेटवर्क मौजूदा 'ग्रीन कनेक्ट नेटवर्क' का विस्तार करेगा, जिससे जंगलों, पार्कों और इकोलॉजिकल कॉरिडोर को शहरी ढांचे से जोड़ा जा सके।
- मुख्य सड़कों के बजाय अलग और समर्पित रास्ते बनाए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा और हादसों में कमी आएगी।
- आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य सरकारी मंत्रालयों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि इन 'शैडो रोड्स' के बनने से दिल्लीवासियों को शहर के भीतर आवाजाही के लिए एक सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त विकल्प मिलेगा।