दिल्ली में पैदल चलने वालों के लिए बनेगा 'शैडो रोड्स' नेटवर्क, अब सुरक्षित होगा सफर
दिल्ली में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए सरकार 'शैडो रोड्स' नेटवर्क लाएगी, जिससे पार्कों और ग्रीन स्पेस को जोड़ा जाएगा।

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सकता है। भारत सरकार शहर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत 'शैडो रोड्स' (Shadow Roads) का एक नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इस खास पहल का मकसद दिल्ली के पार्कों और हरे-भरे इलाकों को आपस में जोड़ना है, ताकि लोगों को मुख्य सड़कों के भारी ट्रैफिक से बचकर चलने के लिए समर्पित और सुरक्षित रास्ते मिल सकें।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का हिस्सा बनाया जाएगा। हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक का मुख्य केंद्र दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था की चुनौतियों को सुलझाना और पैदल चलने वालों के लिए बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना था। चर्चा के बाद, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वे इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ बैठकें करें।
बढ़ती दुर्घटनाओं और कानूनी अधिकारों के बीच लिया गया फैसला
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दिल्ली में पैदल चलने वालों की मौत के आंकड़े चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में पैदल यात्रियों की मृत्यु संख्या 584 थी, जो 2025 में बढ़कर 649 हो गई। यह स्थिति शहर में बेहतर वॉकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट 'वॉक टू वर्क' (ऑफिस तक पैदल जाना) संस्कृति को बढ़ावा देने के विजन से भी मेल खाता है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि निर्धारित फुटपाथों पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। इसी कानूनी और सामाजिक जरूरत को देखते हुए सरकार अब 'शैडो रोड्स' के जरिए दिल्लीवासियों को एक सुरक्षित विकल्प देने की तैयारी कर रही है।