सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में सुरक्षा पाबंदियां कम, 500 से ज्यादा हिरासत में

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में सुरक्षा पाबंदियां कम, 500 से ज्यादा हिरासत में

देश की राजधानी में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी तनाव के बीच अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के बाद दिल्ली प्रशासन ने सुरक्षा प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है। 11 अक्टूबर 2026 को शहर में मेट्रो सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं और इंटरनेट कनेक्शन बहाल कर दिए गए। यह कदम 10 अक्टूबर को की गई उस बड़ी कार्रवाई के बाद आया है, जिसमें हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर प्रदर्शनकारियों पर नकेल कसी गई थी।

दरअसल, यह पूरा विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, उन पर मतदाता सूची में गड़बड़ी करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि मेट्रो और इंटरनेट तो शुरू हो गए हैं, लेकिन मध्य दिल्ली के इलाकों में अब भी धारा 163 लागू है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। इसी बीच रविवार को हुए 'फ्लैश प्रोटेस्ट' (अचानक शुरू हुए प्रदर्शन) के दौरान पुलिस ने 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और राजनीतिक बवाल

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों की आवाजाही सुनिश्चित की जाए, सड़कों से बैरिकेड्स हटाए जाएं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत खत्म की जाए। कोर्ट के इस आदेश के बाद CJP नेता अभिजीत डिपके सहित हजारों लोगों को रिहा किया गया। रिहाई के बाद डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'कायर और बुली' करार दिया और कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा।

इस पूरे crackdown के दौरान केवल राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि पत्रकारों और छात्र नेताओं को भी निशाना बनाया गया। AISF, KYS और AISA जैसे संगठनों के छात्र नेताओं के साथ-साथ 'द इंडियन एक्सप्रेस' के तीन पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया था। सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें गर्दन से पकड़कर सीट पर दबाया गया और उनका गला घोंटने की कोशिश की गई।

इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरीं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने सामूहिक गिरफ्तारियों पर चिंता जताते हुए पत्रकारों और नागरिक समाज के सदस्यों की रिहाई की मांग की। हालांकि, भारत के स्थायी मिशन ने इसे 'अनुचित हस्तक्षेप' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि भारत कानून के दायरे में काम करता है। दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शनकारियों को 'अराजक तत्व' बताया। वहीं, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) ने प्रदर्शनकारियों द्वारा गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रवेश करने की कड़ी निंदा की है और इसे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।

फिलहाल कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में सामान्य जनजीवन लौटने लगा है, लेकिन पूरी दिल्ली में अभी भी भारी पुलिस बल तैनात है और कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।

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