प्रदूषण का खतरा: दिल्ली के स्कूलों में 'विंटर एक्शन प्लान' लागू, जारी हुए निर्देश
दिल्ली के स्कूलों में प्रदूषण से बचाव के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू किया गया है। जानें क्या हैं नए नियम और गाइडलाइन्स।

राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) ने कड़ा रुख अपनाया है। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए अब दिल्ली के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में दिल्ली स्कूल विंटर एक्शन प्लान को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के भीतर हवा की गुणवत्ता को सुधारना और छात्रों को जहरीली हवा के दुष्प्रभावों से बचाना है।
नये दिशा-निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों को अब धूल नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए खुले मैदानों और रास्तों पर पानी का छिड़काव करना होगा ताकि धूल न उड़े। साथ ही, क्लासरूम में वेंटिलेशन का खास ख्याल रखने और परिसर में हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि स्कूल कैंपस में ऐसी कोई भी निर्माण गतिविधि नहीं होगी जिससे धूल उड़े।
जागरूकता अभियान और सुरक्षा उपाय
सिर्फ बुनियादी बदलाव ही नहीं, बल्कि छात्रों की मानसिकता बदलने के लिए स्कूलों में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। 5 और 6 नवंबर के बीच विशेष असेंबली, वाद-विवाद, पोस्टर मेकिंग और स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिताओं के जरिए पटाखों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा, कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और सफाई कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रदूषण से निपटने के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण कदम भी उठाए गए हैं:
- स्कूल प्रशासन स्थानीय वायु गुणवत्ता (AQI) पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर छात्रों को मास्क पहनने की सलाह देगा।
- प्रदूषण बढ़ने पर कई निजी स्कूलों ने बाहरी खेल और गतिविधियों को स्थगित करने का फैसला किया है।
- स्टाफ और अभिभावकों को कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
गौरतलब है कि दिल्ली-NCR में 5 से 20 नवंबर तक वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की निवारक गाइडलाइन्स लागू हैं। हालांकि, 2 नवंबर से GRAP के स्टेज-II लागू हैं, लेकिन फिलहाल स्कूलों को बंद करने या ऑनलाइन क्लास शुरू करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है। ऐसे कदम आमतौर पर स्टेज-III या उससे ऊपर जाने पर उठाए जाते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 10 से 15 नवंबर के बीच किसी भी 'स्मॉग ब्रेक' की खबरें महज चर्चाएं हैं, आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। सभी स्कूलों को अपनी प्रगति रिपोर्ट हर महीने शिक्षा निदेशालय को सौंपनी होगी।