दिल्ली के सभी 1,086 सरकारी स्कूलों में मिलेंगी फर्स्ट-एड सुविधाएं, सरकार ने कसी कमर
दिल्ली सरकार अब सभी 1,086 सरकारी स्कूलों में फर्स्ट-एड मेडिकल सुविधाएं देगी, जिससे छात्रों को तुरंत इलाज मिल सकेगा।

दिल्ली सरकार ने स्कूली बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब शिक्षा निदेशालय के तहत आने वाले सभी 1,086 सरकारी स्कूलों में फर्स्ट-एड मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल समय के दौरान अगर किसी बच्चे को चोट लगती है या वह अचानक बीमार पड़ता है, तो उसे तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का मकसद हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित और सहायक शैक्षिक माहौल तैयार करना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। इस पूरी योजना पर सालाना करीब 48.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब पूरे दिल्ली में लागू होगा प्लान
इस बड़े कदम से पहले अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान 100 सरकारी स्कूलों में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, जिस पर 5 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। उस प्रोग्राम की सफलता के बाद अब इसे पूरे दिल्ली में लागू किया जा रहा है। इस योजना को चरणों में पूरा किया जाएगा। जिन स्कूलों में पहले से मेडिकल रूम के लिए जगह है, वहां काम तुरंत शुरू होगा, जबकि जगह की कमी वाले स्कूलों में वैकल्पिक कमरों या पोर्टा केबिन का इस्तेमाल किया जाएगा।
इन मेडिकल सुविधाओं की खास बातें कुछ इस प्रकार हैं:
- ट्रेन्ड स्टाफ: हर सेंटर पर एएनएम (ANM) या मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर्स तैनात रहेंगे।
- बुनियादी उपचार: चोट लगने पर ड्रेसिंग और ओआरएस (ORS) जैसे प्राथमिक उपचार दिए जाएंगे।
- छात्राओं के लिए सुविधा: इन कमरों का उपयोग छात्राओं द्वारा मासिक धर्म (menstrual health) से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक निजी स्थान के रूप में भी किया जा सकेगा।
हालांकि, सरकार ने यह साफ कर दिया है कि ये यूनिट्स केवल प्राथमिक उपचार और अस्थायी आराम के लिए होंगी। यहां किसी भी तरह की डायग्नोस्टिक जांच या दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन नहीं दिया जाएगा।