दिल्ली के स्कूलों में अब बनेगी एंटी-टोबैको कमेटी, नशा मुक्ति के लिए सख्त निर्देश
दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों के लिए एंटी-टोबैको कमेटी और नशा मुक्ति अभियान के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

दिल्ली के स्कूलों को अब पूरी तरह नशा मुक्त बनाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'नशा मुक्त भारत अभियान' और 'नशा मुक्त दिल्ली अभियान' के तहत अब शहर के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में एंटी-टोबैको कमेटी का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस पहल का मकसद छात्रों को नशे की लत से बचाना और कैंपस में एक सुरक्षित माहौल तैयार करना है।
कैंपस में निगरानी के लिए बनेगी स्पेशल टास्क फोर्स
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, हर स्कूल में एक 'इंस्टीट्यूशन लेवल टास्क फोर्स' (ITF) या एंटी-टोबैको कमेटी बनाई जाएगी, जिसकी कमान स्कूल के प्रिंसिपल या संस्थान के प्रमुख के हाथों में होगी। इस कमेटी में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि नोडल टीचर, हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य, एक छात्र प्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस का एक प्रतिनिधि भी शामिल होगा। यह पूरी टीम एनडीपीएस एक्ट 1985 और सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 के नियमों के तहत काम करेगी।
छात्रों को जागरूक करने के लिए कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए हर महीने की 15 से 17 तारीख के बीच 'नवचेतना लाइफ स्किल्स मॉड्यूल' के जरिए विशेष प्रोग्राम चलाए जाएंगे। सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी साल में कम से कम दो बार (अगस्त और जनवरी में) जागरूकता सत्रों से जोड़ा जाएगा।
अगर किसी छात्र में नशे की लत के लक्षण दिखते हैं, तो स्कूल के लिए एक औपचारिक रेफरल सिस्टम बनाना जरूरी होगा। इसके जरिए छात्र को गोपनीयता बनाए रखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों या नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि उसे बिना किसी सामाजिक बदनामी के इलाज मिल सके।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला स्तर की कमेटियों द्वारा की जाएगी, जिसका नेतृत्व डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन करेंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसके लिए औचक निरीक्षण (सरप्राइज इंस्पेक्शन) भी किए जाएंगे। स्कूलों को हर महीने अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट और चेकलिस्ट जिला अधिकारियों को जमा करनी होगी।