दिल्ली की हवा में घुली सप्तपर्णी की खुशबू, जानिए क्या है इस खास महक का राज

अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली की हवा में आने वाली खास खुशबू का राज सप्तपर्णी के पेड़ों में छिपा है। जानिए इस पेड़ की खासियत और इतिहास।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली की हवा में घुली सप्तपर्णी की खुशबू, जानिए क्या है इस खास महक का राज

जैसे ही अक्टूबर और नवंबर का महीना दस्तक देता है, दिल्ली की हवाओं में एक अजीब सी और तेज खुशबू घुलने लगती है। अगर आप दिल्ली में रहते हैं, तो आपने गौर किया होगा कि शाम होते ही हवा में एक तीखी सी महक छा जाती है। दरअसल, इस खास खुशबू के पीछे का राज दिल्ली की सप्तपर्णी खुशबू यानी सप्तपर्णी (Alstonia scholaris) के पेड़ों का खिलना है।

सप्तपर्णी के पेड़ों पर फूल खिलने की शुरुआत सितंबर के अंत से होती है और यह सिलसिला दिसंबर तक चलता है। इन फूलों से निकलने वाली तेज और मसालेदार महक खासकर शाम और रात के समय ज्यादा महसूस होती है। दिलचस्प बात यह है कि इस खुशबू को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है; जहां कुछ लोगों को यह महक बहुत पसंद आती है, वहीं कुछ इसे काफी अजीब या भारी महसूस करते हैं।

प्रदूषण से लड़ने वाला 'डेविल्स ट्री' और इसका इतिहास

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वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सर्दियों की शांत हवाएं और स्मॉग इस खुशबू को जमीन के करीब रोक लेते हैं, जिससे यह और भी ज्यादा महसूस होती है। कभी-कभी यह महक शहर के प्रदूषण के साथ मिलकर एक अलग तरह का अनुभव पैदा करती है। इस पेड़ को लोक कथाओं में 'डेविल्स ट्री' (Devil's Tree) भी कहा जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यताएं थीं कि इसकी शाखाओं में आत्माएं रहती हैं।

दिल्ली में इन पेड़ों का सफर 1940 के दशक में शुरू हुआ था, जब इन्हें सबसे पहले गोल्फ लिंक्स इलाके में लगाया गया था। इसके बाद ये धीरे-धीरे पूरे शहर में फैल गए। सप्तपर्णी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शहरी प्रदूषण को झेलने में बेहद सक्षम है।

महक के अलावा, इस पेड़ का औषधीय और सांस्कृतिक महत्व भी काफी अधिक है। इसकी छाल, जिसे 'डिटा बार्क' कहा जाता है, का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में बुखार, अस्थमा, पेचिश और दस्त जैसी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। साथ ही, यह पश्चिम बंगाल का राजकीय वृक्ष भी है।

इस पेड़ का एक ऐतिहासिक जुड़ाव विश्व-भारती विश्वविद्यालय से भी है, जहां रवींद्रनाथ टैगोर ने दीक्षांत समारोह के दौरान विद्वानों को सप्तपर्णी की पत्तियां भेंट करने की परंपरा शुरू की थी। इस तरह, दिल्ली की सड़कों पर दिखने वाला यह पेड़ न केवल शहर की हवा को महकाता है, बल्कि अपने साथ इतिहास और सेहत का खजाना भी समेटे हुए है।

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