रोहिणी कोर्ट ने पत्नी के मुंह में तेजाब डालने के आरोपी पति की तीसरी जमानत याचिका खारिज की

Kittu Kumari26 September 20262 min read5 viewsDelhi Local
रोहिणी कोर्ट ने पत्नी के मुंह में तेजाब डालने के आरोपी पति की तीसरी जमानत याचिका खारिज की

रोहिणी कोर्ट ने साल 2018 के एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी पति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इस मामले में आरोपी पर अपनी पत्नी के मुंह में जबरन तेजाब जैसा पदार्थ डालने का गंभीर आरोप है। रोहिणी कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ऋचा मनचंदा ने आरोपी जितेंद्र उर्फ जोनी की तीसरी जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया। यह पूरा मामला शाहबाद डेयरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। इस खबर की विस्तृत जानकारी के लिए आप ANI की मूल रिपोर्ट देख सकते हैं।

घटना और कानूनी धाराएं

प्रॉसीक्यूशन के अनुसार, आरोपी जितेंद्र और अन्य सह-आरोपियों ने मिलकर पीड़िता के मुंह में जबरन तेजाब जैसा पदार्थ डाला था। इस मामले में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 342, 326-A, 328 और 34 के तहत मामला दर्ज है। 18 नवंबर 2019 को इन सभी धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान पीड़िता मोनिका की तरफ से अधिवक्ता अदिति द्रॉल पेश हुईं, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त लोक अभियोजक जे.एस. मलिक अदालत में मौजूद रहे।

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बचाव पक्ष और सरकारी वकील के तर्क

राज्य के वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को इस मामले में झूठा फंसाया गया है और वह 28 जून 2018 से न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि इस मामले में पीड़िता की गवाही हो चुकी है और अब हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। इसके अलावा पारिवारिक विवाद और अन्य शिकायतों का हवाला भी दिया गया।

अदालत की सख्त टिप्पणी और फैसला

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी जितेंद्र ने पहले मिली अंतरिम जमानत का उल्लंघन किया था और वह जमानत छोड़कर भाग गया था जिसके बाद उसे भगोड़ा घोषित किया गया था। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि सह-आरोपी सुमन को एफआईआर दर्ज होने के सात-आठ साल बाद गिरफ्तार किया गया था और वह भी भगोड़ा घोषित हुई थी, जबकि आरोपी का भाई अभी भी फरार है। गंभीर आरोपों और पिछले आचरण को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी के दोबारा जमानत छोड़कर भागने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे मुकदमे में देरी होगी। इन सभी कारणों का हवाला देते हुए अदालत ने जितेंद्र की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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