दिल्ली की सड़कों पर धूल कम करने में नाकाम MCD? CAQM ने बताया मशीनों का हाल

दिल्ली की सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों की भारी कमी है। CAQM की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि केवल 35-40% सड़कें ही साफ हो पा रही हैं।

Kittu Kumari22 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली की सड़कों पर धूल कम करने में नाकाम MCD? CAQM ने बताया मशीनों का हाल

सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है, लेकिन शहर की सड़कों को धूल मुक्त रखने की तैयारी अभी भी अधूरी नजर आ रही है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के एक हालिया आकलन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली की मुख्य सड़कों का केवल 35% से 40% हिस्सा ही मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSMs) के जरिए एक दिन छोड़कर साफ किया जा पा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सड़क नेटवर्क को पूरी तरह कवर करने के लिए करीब 172 मशीनों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में शहर में केवल 100 के करीब मशीनें ही काम कर रही हैं। वहीं, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के विश्लेषण में भी यह बात सामने आई है कि तकनीकी रूप से उपयुक्त सभी सड़कों के प्रबंधन के लिए 161 मशीनों की आवश्यकता होगी, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था से केवल 18% आबादी तक ही पहुंच बन पा रही है।

प्रदूषण रोकने के लिए सरकार और NHAI की तैयारी

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हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए CAQM ने 21 अक्टूबर 2026 को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-I को लागू कर दिया था, जिसमें मशीनीकृत सफाई को धूल नियंत्रण का मुख्य उपाय बताया गया है। इसी कड़ी में CAQM चेयरमैन राजेश वर्मा और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ने एक समीक्षा बैठक की, जिसमें एमसीडी (MCD) को खुले स्थानों पर धूल कम करने के प्रयासों को तेज करने के निर्देश दिए गए।

दूसरी ओर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कमर कसी है। NHAI के सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपंकर ने बताया कि नेशनल हाईवे के हिस्सों पर 23 रोड स्वीपिंग मशीनें, 60 वॉटर स्प्रिंकलर और 14 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं ताकि CAQM के नियमों का सख्ती से पालन हो सके।

इस कमी को दूर करने के लिए एमसीडी अब नई तैयारी कर रहा है। नवंबर के मध्य तक 70 नई मशीनें तैनात करने की योजना है, जिनमें 55 इलेक्ट्रिक और 15 CNG संचालित यूनिट्स शामिल होंगी। साथ ही, दिल्ली सरकार के 'विंटर एक्शन प्लान' (1 नवंबर से 28 फरवरी) के तहत 250 वार्डों की 854 सड़कों पर सफाई का दायरा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की अनुमिता रॉयचौधरी ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया है। उनका कहना है कि हालांकि ये मशीनें इंसानी श्रम से बेहतर हैं, लेकिन उबड़-खाबड़ सड़कों और गड्ढों वाले रास्तों पर इनका असर बहुत कम हो जाता है, जो दिल्ली की कई सड़कों की हकीकत है।

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