दिल्ली की सड़कों पर मौत का तांडव: 2026 में रिकॉर्ड हादसे, अब हर दिन औसतन 5 मौतें

देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें इन दिनों खूनी साबित हो रही हैं। साल 2026 के पहले नौ महीनों के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं, जिसने पिछले छह सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिल्ली में सड़क हादसों का ग्राफ इतनी तेजी से बढ़ा है कि अब हर दिन औसतन पांच लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। यह स्थिति शहर की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल 4,679 सड़क हादसे हुए। इन दुर्घटनाओं में 1,309 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4,662 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को है, जो कुल मौतों का 81% हिस्सा हैं। अकेले पैदल चलने वालों की बात करें तो करीब 492 लोगों ने इन हादसों में दम तोड़ दिया। वाहनों की बात करें तो सबसे ज्यादा हादसे कारों (15%), ट्रकों (13%) और बसों (6%) की वजह से हुए, जबकि ई-रिक्शा की भागीदारी 2.5% रही।
अब गलती की गुंजाइश नहीं: लाइसेंस रद्द होंगे और लगेगा जुर्माना
सड़कों पर बढ़ते खून-खराबे को रोकने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेहद सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। अब ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी। नए नियमों के तहत, अगर कोई चालक एक साल में पांच या उससे ज्यादा बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जा सकता है या उस पर ड्राइविंग बैन लगाया जा सकता है। इसके अलावा, अब ट्रैफिक चालान का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
प्रशासन अब केवल जुर्माना वसूलने के बजाय सड़क सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान शराब पीकर गाड़ी चलाने, लापरवाही से ओवरटेक करने और सिग्नल तोड़ने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
तकनीक के जरिए इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली में 'इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) को लागू कर दिया गया है। इसमें AI-पावर्ड कैमरों और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्टॉप-लाइन उल्लंघन जैसी गलतियों को तुरंत पकड़ा जा सके।
यह संकट केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अगस्त 2026 में गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि सड़क हादसों में होने वाली मौतें अब युद्ध या बीमारियों से होने वाली मौतों से भी ज्यादा हो गई हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि 5 से 29 साल के युवाओं के लिए सड़क दुर्घटनाएं मौत का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं।