2020 दिल्ली दंगे: मोनीश की हत्या के मामले में 5 दोषियों की सजा बरकरार, हाई कोर्ट ने खारिज की अपील
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दंगों में मोनीश की हत्या के मामले में पांच दोषियों की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी।

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 22 वर्षीय युवक मोनीश की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए पांच व्यक्तियों की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस मधु जैन ने इन पांचों आरोपियों द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही माना है।
यह पूरा मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, चाँद बाग स्थित पीर बाबा मजार के पास बृजपुरी इलाके में भीड़ ने मोनीश का पीछा किया और उसे बुरी तरह पीटा। गंभीर हालत में उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण दिमाग में शॉक लगा, जिससे उसकी जान गई।
इन धाराओं के तहत मिली सजा
हाई कोर्ट ने अमन कश्यप, देविंदर कुमार, प्रदीप राय, आशीष उर्फ गोली और अरुण कुमार की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। इन सभी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148 (दंगा करना) और धारा 304 पार्ट I (गैर-इरादतन हत्या) के साथ धारा 149 के तहत दोषी पाया गया था।
निचली अदालत ने इन दोषियों को धारा 148 के तहत एक साल के साधारण कारावास और धारा 304 पार्ट I के तहत सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, साथ ही 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। दोषियों ने कड़कड़डूमा कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में विसंगतियों और पहचान परेड न होने का तर्क दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने पुलिस गवाहों, विशेषकर कांस्टेबल पीयूष की गवाही को अहम माना, जिन्होंने इन पांचों को भीड़ के आगे रहकर हमला भड़काने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दंगों के दौरान दर्ज कई मामलों के कारण बयानों में हुई देरी स्वाभाविक थी और इसे आधार बनाकर दोषियों को रिहा नहीं किया जा सकता।