दिल्ली सरकार लाई सख्त 'राइट टू सर्विस' बिल 2026, काम में देरी पर अधिकारियों पर लगेगा भारी जुर्माना

दिल्ली सरकार ने नागरिकों को समय पर सरकारी सेवाएं देने के लिए 'दिल्ली नागरिक समयबद्ध एवं सुगम सेवा प्रदानाअर्थ अधिकार विधेयक, 2026' पेश किया है। जुलाई 2026 के मध्य में कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद, 11 अगस्त 2026 को दिल्ली विधानसभा ने इस बिल को पास कर दिया है। इसे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पंकज कुमार सिंह द्वारा पेश किया गया था। इस नए कानून के तहत, यदि किसी सरकारी सेवा को देने में बिना किसी वाजिब कारण के देरी होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी पर हर दिन ₹250 का जुर्माना लगेगा, जो अधिकतम ₹5,000 तक हो सकता है। यह जानकारी PTI News के माध्यम से सामने आई है।
दिल्ली सरकार का यह नया बिल:
- समय पर सरकारी सेवाएं देने के लिए लाया गया है।
- बिना कारण देरी होने पर प्रतिदिन ₹250 का जुर्माना तय करता है।
- आवेदन बिना उचित कारण खारिज होने पर ₹250 से ₹5,000 तक का जुर्माना लगाता है।
- साल 2011 के पुराने कानून की जगह लेता है जिसमें ₹10 प्रतिदिन का जुर्माना था।
अधिकारियों के वेतन से होगी जुर्माने की वसूली
रोजाना लगने वाले जुर्माने के अलावा, अगर कोई आवेदन बिना किसी ठोस वजह के खारिज कर दिया जाता है, तो अधिकारियों पर ₹250 से ₹5,000 तक का एकमुश्त जुर्माना लगाने का अधिकार भी इस बिल में दिया गया है। यह वित्तीय जुर्माना सीधे तौर पर दोषी पाए गए अधिकारी के वेतन से काटा जाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसी कार्रवाई करने से पहले अधिकारी को देरी के संबंध में अपनी बात रखने का औपचारिक मौका दिया जाएगा। यह नया कानून, साल 2011 के 'दिल्ली (राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विसेज) एक्ट' की जगह लेगा, जिसमें पहले बहुत कम यानी मात्र ₹10 प्रतिदिन का दैनिक जुर्माना तय किया गया था।
डिजिटल डिलीवरी और ऑटोमैटिक एस्केलेशन सिस्टम
इस नए कानून की मुख्य विशेषताओं में डिजिटल सर्विस डिलीवरी पर जोर देना शामिल है, जिसकी मदद से नागरिक एक यूनिक एप्लीकेशन नंबर का उपयोग करके अपने एप्लीकेशन को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकते हैं। इस बिल में एक ऑटोमैटिक एस्केलेशन मैकेनिज्म भी बनाया गया है; यदि तय किया गया अधिकारी डेडलाइन को पूरा नहीं करता है, तो मामले को 'सिटिजन ग्रीवांस रिड्रैसल अथॉरिटी' के पास भेज दिया जाता है, जिसे 30 दिनों के भीतर मामले का समाधान करना होगा। अगर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो इसे नए प्रस्तावित 'दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन' के पास भेज दिया जाएगा।