विरोध प्रदर्शन से बिजनेस ठप, कनॉट प्लेस के रेस्टोरेंट मालिक ने हाई कोर्ट से मांगा मुआवजा

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
विरोध प्रदर्शन से बिजनेस ठप, कनॉट प्लेस के रेस्टोरेंट मालिक ने हाई कोर्ट से मांगा मुआवजा

दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में बिजनेस करने वालों के लिए पिछले कुछ दिन काफी तनावपूर्ण रहे हैं। 10 अक्टूबर को हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन के कारण व्यापार में भारी गिरावट आई, जिससे परेशान होकर अब एक रेस्टोरेंट मालिक ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मीनार रेस्टोरेंट के मालिक आयुष चोपड़ा ने याचिका दायर कर मांग की है कि प्रदर्शन की वजह से उन्हें और अन्य व्यापारियों को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन किया जाए और जिम्मेदार पक्षों से मुआवजा दिलाया जाए।

वकीलों उमंग त्यागी, संयम दहिया और जुबेर अली के माध्यम से दायर इस याचिका में यह मांग की गई है कि आर्थिक नुकसान के लिए जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, कोर्ट से यह भी अपील की गई है कि मार्केट एरिया में इस तरह के अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए ताकि भविष्य में व्यापारियों को ऐसी मुश्किलों का सामना न करना पड़े।

करोड़ों का नुकसान और कानूनी पेच

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

यह मामला केवल एक रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे व्यापारिक समुदाय की चिंता को दर्शाता है। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन और नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया जैसे संगठनों ने इस आर्थिक व्यवधान पर गहरी चिंता जताई है। अनुमान के मुताबिक, सिर्फ 10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में 150 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि पूरी राजधानी में इसका कुल असर करीब 2,000 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है।

इस पूरे विवाद के पीछे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा 'तिरंगा मार्च' का आह्वान था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की और अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया।

अदालती कार्यवाही की बात करें तो एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने फिलहाल प्रदर्शनों पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन याचिका को अन्य संबंधित मामलों के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह संकेत दिया है कि यदि याचिकाकर्ता यह साबित कर पाते हैं कि नुकसान गैरकानूनी कार्यों की वजह से हुआ है, तो मुआवजे के दावों पर विचार किया जा सकता है।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि सेंट्रल पार्क विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह नहीं है। हालांकि जंतर मंतर लंबे समय तक प्रदर्शन स्थल रहा, लेकिन 11 अक्टूबर को इसकी स्थिति बदल दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि विरोध का अधिकार असीमित नहीं है और इसे कहीं भी, कभी भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि त्योहारी सीजन में छोटे दुकानदारों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

Share:

Comments

Leave a comment