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दिल्ली में पिछले 7 साल में सबसे प्रदूषित रहा जुलाई, सरकार ने लागू किए नए Air Quality प्लान

Kittu Kumari30 July 20262 min read20 views
दिल्ली में पिछले 7 साल में सबसे प्रदूषित रहा जुलाई, सरकार ने लागू किए नए Air Quality प्लान

दिल्ली-NCR के लोगों के लिए इस बार का जुलाई महीना हवा की गुणवत्ता के मामले में काफी खराब रहा है। साल 2026 में पिछले 7 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है और जुलाई सबसे ज्यादा प्रदूषित दर्ज किया गया है। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, CPCB के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि जुलाई के पहले 30 दिनों में औसत Air Quality Index (AQI) 119 रहा, जिसे 'moderate' (मध्यम) श्रेणी में रखा गया है।

  • जुलाई 2026 का औसत AQI 119 रहा, जो 2019 के बाद सबसे ज्यादा है।
  • इस महीने 15 दिन 'moderate', 12 दिन 'satisfactory', 2 दिन 'poor' और 1 दिन 'good' AQI दर्ज हुआ।
  • 12 जुलाई को इस महीने का सबसे ज्यादा 261 AQI दर्ज किया गया, जो 5 साल में जुलाई का सबसे खराब दिन था।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

सफदरजंग स्टेशन पर सामान्य से ज्यादा बारिश (201.9 mm के मुकाबले 254.7 mm) होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर बढ़ना चिंता का विषय रहा। पर्यावरण विशेषज्ञों (जैसे सुनील दहिया और अनुमिता रायचौधरी) का कहना है कि लंबा ड्राई स्पेल, हवा में ज्यादा नमी, कमजोर हवाएं और सड़कों पर उड़ने वाली धूल इसके मुख्य कारण रहे। Skymet Weather के महेश पालावत ने बताया कि राजस्थान और पाकिस्तान-ईरान जैसे पड़ोसी देशों से आई सूखी पछुआ हवाओं (westerly winds) के कारण 12 और 13 जुलाई को AQI 'poor' श्रेणी में पहुंच गया। इसके अलावा, जुलाई 2026 में पिछले दो सालों की तुलना में सबसे ज्यादा दिन और रात का तापमान भी दर्ज किया गया।

दिल्ली सरकार के नए प्रदूषण नियंत्रण उपाय

बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2026 को एक स्थायी विंटर पॉल्यूशन कंट्रोल फ्रेमवर्क लागू किया है, जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अपने आप एक्टिव हो जाएगा। इसमें 'नो PUC, नो फ्यूल' नियम, नॉन-BS VI वाहनों पर रोक, पार्किंग फीस बढ़ाना और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मोग गन लगाना शामिल है। साथ ही, सरकार ने 1 जुलाई 2026 को एक नई Electric Vehicle (EV) policy भी अपनाई है, जिसका लक्ष्य 2027 तक नए वाहनों में ज्यादातर EV रजिस्ट्रेशन कराना है। इसके अलावा, ओखला लैंडफिल को जुलाई 2026 तक और भलस्वा लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक साफ करने की समयसीमा तय की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ बारिश पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सालों-साल लगातार एमिशन (emissions) कम करने होंगे।

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