महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली की सड़कों पर उतरीं नागरिक, 'रिक्लेम द नाइट' मार्च में गूंजी आजादी की मांग

राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा, उनकी आजादी और सार्वजनिक स्थानों पर बिना किसी डर के घूमने के अधिकार को लेकर एक बड़ा अभियान शुरू हुआ है। 9 अक्टूबर 2026 को बड़ी संख्या में नागरिक 'रिक्लेम द नाइट' (Reclaim the Night) वॉक के लिए इकट्ठा हुए। इस मार्च के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि शहर की सड़कें और सार्वजनिक जगहें सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भी उतनी ही सुरक्षित होनी चाहिए।
इस विरोध मार्च का नेतृत्व यशिका शेख, राजलक्ष्मी सिंह यादव और रिचा ने किया। प्रदर्शनकारी लोधी गार्डन से इंडिया गेट तक पैदल चले, ताकि समाज में महिलाओं की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों और सोच को चुनौती दी जा सके। मार्च में शामिल लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि दिन हो या रात, महिलाओं को बिना किसी खौफ के सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करने का मौलिक अधिकार है।
सुरक्षा के नाम पर पाबंदियां अब और नहीं
आयोजकों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि अक्सर महिलाओं को ही यह सलाह दी जाती है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए अपनी आवाजाही सीमित कर लें। इस बारे में यशिका शेख ने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि महिलाओं को सुरक्षित रहने के लिए खुद को सीमित करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजादी किसी शर्त पर नहीं मिलनी चाहिए। वहीं राजलक्ष्मी सिंह यादव ने कहा कि अंधेरा होने के बाद महिलाओं की आवाजाही रोकना असल समस्या का समाधान नहीं है। असली मकसद यह होना चाहिए कि समाज का हर सदस्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करे।
इस आयोजन की सफलता को देखते हुए आयोजकों ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब 'रिक्लेम द नाइट' वॉक हर महीने आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य इस चर्चा को जीवित रखना और यह याद दिलाना है कि आवाजाही की स्वतंत्रता लैंगिक समानता (gender equality) का एक अनिवार्य हिस्सा है।