दिल्ली में राशन वितरण सिस्टम फेल, 3 लाख लोगों की थाली से छूटा अनाज

राजधानी दिल्ली में राशन वितरण प्रणाली की तकनीकी खामियों ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अक्टूबर महीने में करीब 3 लाख राशन कार्ड धारक अपना हक पाने से वंचित रह गए। यह समस्या मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (e-POS) वितरण प्रणाली में आ रही रुकावटों के कारण पैदा हुई है, जिसने आम जनता और राशन डीलरों दोनों की परेशानी बढ़ा दी है।
दिल्ली गवर्नमेंट राशन डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शिव कुमार गर्ग ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं। उनके मुताबिक, सितंबर महीने में जहां 91.69% लाभार्थी सफलतापूर्वक राशन ले पा रहे थे, वहीं अक्टूबर में यह आंकड़ा गिरकर 85.87% पर आ गया। यह गिरावट उस समय आई है जब केंद्र सरकार ने देशभर में एक बड़ा अभियान चलाया है। 1 अक्टूबर से उन राशन कार्डों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जो पिछले छह महीनों से निष्क्रिय थे। इस कदम का मकसद सिस्टम से फर्जी या डुप्लीकेट लाभार्थियों को हटाना है, जिससे देशभर में करीब 1.58 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं।
तकनीकी बाधाएं और नए कड़े नियम
अब जिन लोगों के कार्ड बंद हुए हैं, उन्हें दोबारा राशन पाने के लिए अनिवार्य e-KYC और फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि, बुजुर्गों और मजदूरों के लिए, जिनके फिंगरप्रिंट स्कैन नहीं हो पाते, 'फेस ऑथेंटिकेशन' (चेहरा पहचान प्रणाली) शुरू की गई है, लेकिन दिल्ली के डीलरों का कहना है कि जमीनी स्तर पर इसे लागू करने में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
सिर्फ तकनीकी समस्या ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्था भी सामने आई है। डीलरों का आरोप है कि उन्हें अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का राशन एक साथ बांटने के निर्देश तो मिले, लेकिन सप्लाई समय पर नहीं पहुंची और उनका कमीशन भी बकाया है।
इसके साथ ही, दिल्ली सरकार ने 15 फरवरी 2026 से खाद्य सुरक्षा नियमों को और सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत अब उन परिवारों को राशन नहीं मिलेगा जिनके पास खुद का पक्का मकान है, जो चार पहिया वाहन रखते हैं, जिनकी आय अधिक है या जिनका बिजली बिल ज्यादा आता है। इन कड़े मापदंडों ने लाभार्थियों की संख्या को और कम कर दिया है, जिससे कई पात्र लोग भी अब इस सुविधा से बाहर हो रहे हैं।