दिल्ली की रामलीला: मुगल काल के खुले मैदानों से आधुनिक तकनीक और सरकारी नियमों तक का सफर

Kittu Kumari5 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली की रामलीला: मुगल काल के खुले मैदानों से आधुनिक तकनीक और सरकारी नियमों तक का सफर

दिल्ली की रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर के बदलते इतिहास की गवाह है। मुगल काल के दौर में शुरू हुई यह परंपरा आज हाई-टेक स्टेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कड़े सरकारी नियमों के बीच सिमट गई है। जिस रामलीला को कभी शाहजहाँबाद के खुले मैदानों में देखा जाता था, वह अब एक व्यवस्थित शासन और आधुनिक प्रबंधन का हिस्सा बन चुकी है।

इतिहास की बात करें तो शाहजहाँ द्वारा राजधानी को शाहजहाँबाद स्थानांतरित करने के बाद, रामलीला यमुना नदी और लाल किले के बीच के खुले मैदानों में आयोजित की जाती थी। उस दौर में शाही परिवार किले की खिड़कियों से इस उत्सव को देखता था। रावण के पुतले कागज और गत्ते से बनाए जाते थे और एक अनोखी परंपरा थी जिसमें पुतले से लाल चाशनी बहाई जाती थी, जो जीत का प्रतीक मानी जाती थी। हालांकि, औरंगजेब के समय में इस पर प्रतिबंध लगा, लेकिन बाद में मोहम्मद शाह रंगीला के शासनकाल में सेठ लाला सीताराम ने अपनी हवेली में आयोजन की अनुमति ली, जिससे सीताराम बाजार रामलीला का एक बड़ा केंद्र बन गया।

बदलता स्वरूप और आधुनिक प्रबंधन

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समय के साथ रामलीला के आयोजन स्थल भी बदले। जिस रामलीला मैदान को आज हम जानते हैं, वह 1930 से पहले 'शाह का तालाब' नाम का एक तालाब था, जिसे बाद में पंजाब से आए शरणार्थियों के लिए कमला मार्केट बनाने हेतु भर दिया गया। आज की रामलीलाएं केवल पारंपरिक नहीं रहीं, बल्कि इनमें बड़ी स्क्रीन और एआई जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।

अब इस उत्सव को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक व्यापक ढांचा तैयार किया है। रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पूजा के लिए तीन विशेष समितियां बनाई गई हैं। रामलीला समिति की अध्यक्षता सामाजिक कल्याण, एससी/एसटी कल्याण, सहकारिता और चुनाव मंत्री रविंद्र इंद्रराज सिंह कर रहे हैं। इस समिति में कई विधायक शामिल हैं और राजस्व सचिव सदस्य सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव 'सिंगल विंडो सिस्टम' की शुरुआत है, जिससे अब एनओसी (NOC) लेना आसान हो गया है।

सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। दिल्ली पुलिस और श्री रामलीला महासंगठन के बीच समन्वय बैठकें हुई हैं ताकि भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर किया जा सके। अब सभी आयोजन स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है। साथ ही, हर रात 9 बजे नशा विरोधी संकल्प लेने और संत वाल्मीकि व संत रविदास के चित्रों को प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बुनियादी सुविधाओं में राहत देते हुए बिजली सुरक्षा जमा राशि को घटाकर एक चौथाई कर दिया गया है और 1200 यूनिट मुफ्त बिजली पर चर्चा हुई है। वहीं, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने खुले मैदानों की बुकिंग के लिए नई एसओपी (SOP) जारी की है। इसमें पुराने आयोजकों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन स्टालों और झूलों के लिए सख्त नियम होंगे और मैदान खाली न करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।

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