दिल्ली में बारिश से प्रदूषण को मिलती है बस कुछ दिनों की राहत, 22 साल की स्टडी में खुलासा
22 साल की स्टडी में खुलासा: दिल्ली में बारिश के बाद हवा बहुत जल्दी फिर से प्रदूषित हो जाती है। जानिए क्या है पूरी रिपोर्ट।

अक्सर जब दिल्ली में बारिश होती है, तो हमें लगता है कि हवा साफ हो गई है और प्रदूषण कम हो गया है। लेकिन क्या यह राहत वाकई लंबी चलती है? एक ताजा और व्यापक शोध ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। 22 साल तक चले एक अध्ययन में यह सामने आया है कि दिल्ली में बारिश के कारण एरोसोल प्रदूषण से मिलने वाली राहत बहुत ही अस्थायी होती है और हवा की गुणवत्ता बहुत जल्द वापस पुराने स्तर पर पहुंच जाती है।
शोधकर्ताओं ने साल 2003 से 2024 के बीच हुई 612 बारिश की घटनाओं का गहराई से विश्लेषण किया। इस अध्ययन का मकसद यह देखना था कि बारिश के बाद प्रदूषण के कण कितनी देर तक कम रहते हैं। नतीजे चौंकाने वाले थे—करीब 50% से ज्यादा मामलों (310 घटनाओं) में यह देखा गया कि बारिश के महज पांच दिनों के भीतर प्रदूषण का स्तर वापस वैसा ही हो गया जैसा बारिश से पहले था। वहीं, लगभग 45% मामलों में प्रदूषण को अपने मूल स्तर पर लौटने में 30 दिन से भी ज्यादा का समय लगा।
बारिश की मात्रा से नहीं बदलती हवा की क्वालिटी
इस स्टडी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बारिश कितनी ज्यादा हुई, इसका प्रदूषण के वापस लौटने की रफ्तार से कोई खास संबंध नहीं मिला। यानी चाहे हल्की बारिश हो या तेज, हवा की सफाई का असर ज्यादा समय तक नहीं टिकता। मौसम के हिसाब से रिकवरी का समय अलग-अलग रहा: मानसून के दौरान औसतन छह दिन, गर्मी और सर्दी में पांच दिन, जबकि मानसून के बाद के समय में यह केवल तीन दिन था।
वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए सैटेलाइट आधारित 'एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ' माप और मौसम के आंकड़ों का इस्तेमाल किया, जिसमें केवल उन घटनाओं को शामिल किया गया जहां रोजाना 5 मिमी से अधिक बारिश हुई। मुख्य शोधकर्ता डॉ. सतींद्रन ने जोर देकर कहा कि हम केवल मौसम या बारिश के भरोसे हवा साफ होने की उम्मीद नहीं कर सकते।
हवा में प्रदूषण के इतनी जल्दी वापस आने की मुख्य वजह गाड़ियों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य और हवा में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं हैं, जो नए कण पैदा करती हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की हवा में PM2.5 का एक बड़ा हिस्सा (29.3% से 42.2%) इन्हीं रासायनिक प्रतिक्रियाओं का नतीजा है। यह स्टडी साफ करती है कि दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केवल बारिश का इंतजार करना काफी नहीं है, बल्कि उत्सर्जन को कम करने की स्थायी रणनीतियों पर काम करना जरूरी है।