दिल्ली की 120 साल पुरानी मस्जिद को खाली करने का नोटिस, प्रशासन सख्त

दिल्ली की 120 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने का नोटिस जारी। बिजली-पानी कटा, मामला अब कोर्ट और सरकार तक पहुंचा।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली की 120 साल पुरानी मस्जिद को खाली करने का नोटिस, प्रशासन सख्त

राजधानी दिल्ली में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की मुहिम के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने दिल्ली की करीब 120 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद (जिसे हुजरा कुआं मस्जिद भी कहा जाता है) को खाली करने का नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन पर एक अनधिकृत निर्माण बताया है और मस्जिद प्रबंधन को छह दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। दिल्ली की पुरानी मस्जिद नोटिस के इस मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है।

तनाव की शुरुआत 7 अक्टूबर 2026 को हुई, जब प्रशासन ने मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी। इस फैसले के खिलाफ मस्जिद के इमाम ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 15 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने बिजली-पानी बहाल करने की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह याचिका दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा दायर की जानी चाहिए थी, न कि इमाम द्वारा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और राजनीतिक प्रतिक्रिया

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मस्जिद के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात है और बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। मीडिया की एंट्री पर पाबंदी है और वहां आने वाले जायरीनों की कड़ी सुरक्षा जांच की जा रही है। इसके बावजूद, 23 अक्टूबर 2026 को जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से अदा की गई। इमाम मौलाना मोहम्मद हारून ने इस पूरी स्थिति को 'ईमान की परीक्षा' करार दिया है।

यह मस्जिद NDMC की हेरिटेज लिस्ट में ग्रेड-II स्मारक के रूप में दर्ज है और 1977 के दिल्ली गजट में इसे वक्फ संपत्ति बताया गया है। इस कार्रवाई का विरोध पीडीपी अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती और आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान जैसे दिग्गजों ने किया है। वहीं, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से हस्तक्षेप की अपील की है।

जमीअत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। बताया जा रहा है कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। गौरतलब है कि इस इलाके में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के कारण अब तक करीब 700 परिवार विस्थापित हो चुके हैं।

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