ग्राउंडवाटर रिचार्ज के लिए दिल्ली PWD ने फुटपाथों पर लगाईं जालीदार टाइल्स, छिड़ा विवाद
दिल्ली PWD ने ग्राउंडवाटर रिचार्ज के लिए फुटपाथों पर जालीदार टाइल्स लगाई हैं, लेकिन अब लोग सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

राजधानी दिल्ली में जल स्तर को सुधारने और बारिश के पानी को जमीन के अंदर भेजने के लिए दिल्ली PWD ने एक नया प्रयोग किया है। विभाग ने शहर के फुटपाथों पर पारंपरिक ठोस पेवर ब्लॉक्स की जगह अब छिद्रित (perforated) ग्रिड वाले कंक्रीट ब्लॉक लगाने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली PWD छिद्रित टाइल्स लगाने का यह मकसद बारिश के पानी को सीधे मिट्टी तक पहुंचाना है, ताकि शहरी इलाकों में होने वाले जलभराव की समस्या को कम किया जा सके और भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य केवल पानी का प्रबंधन नहीं है, बल्कि सड़क किनारे लगे पेड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना भी है। इन जालीदार ब्लॉक्स की मदद से मिट्टी में हवा और पानी का संचार बेहतर होगा, जिससे पेड़ों की जड़ें ज्यादा मजबूती से विकसित हो सकेंगी। हाल ही में शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र में इन नई टाइल्स की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आया है।
पर्यावरण की सोच, लेकिन पैदल चलने वालों की बढ़ी परेशानी
भले ही यह कदम पर्यावरण की दृष्टि से सराहनीय लग रहा हो, लेकिन आम जनता के बीच इसे लेकर नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन टाइल्स का डिजाइन पैदल चलने वालों, खासकर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों ने निम्नलिखित चिंताएं जताई हैं:
- महिलाओं की हाई हील्स इन छेदों में फंस सकती हैं, जिससे गिरने का डर है।
- व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले लोगों और सफेद छड़ी (white cane) का सहारा लेने वाले दृष्टिबाधित व्यक्तियों को चलने में काफी दिक्कत आएगी।
- इन छेदों में कूड़ा-कचरा जमा होने और जंगली घास उगने की संभावना है, जिससे रखरखाव की समस्या बढ़ जाएगी।
विरोध कर रहे लोगों का सुझाव है कि यदि इन गैप्स को मिट्टी या कोको पीट से भरकर उनमें घास लगा दी जाए, तो यह न केवल दिखने में सुंदर लगेगा, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचाएगा और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित भी रहेगा।