भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान यानी पूसा इंस्टीट्यूट का इतिहास बिहार से इसके दिल्ली स्थानांतरण से जुड़ा है। यह संस्थान मूल रूप से 1905 में बिहार के पूसा में अमेरिकी परोपकारी हेनरी फिप्स के अनुदान से स्थापित किया गया था। 15 जनवरी 1934 को बिहार में आए एक भयानक भूकंप के बाद, यह संस्थान 29 जुलाई 1936 को अपने वर्तमान दिल्ली परिसर में स्थानांतरित हो गया। ब्रिटिश प्रशासन ने 1932 में वर्तमान परिसर के लिए भूमि अधिग्रहण की थी, जिसमें शादिपुर, खानपुर और नारायणा गांव शामिल थे। इसके अलावा, टोडापुर और दसघरा गांवों पर 'चुल्हा कर' लगाया गया था। पूसा सुविधा विशेष रूप से पश्चिम दिल्ली में पटेल नगर के पास स्थित खानपुर की भूमि पर बनाई गई थी। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में अधिक जानकारी प्रेस सूचना ब्यूरो की विज्ञप्ति में देखी जा सकती है।
हाल के आधिकारिक प्रयासों ने संस्थान के निरंतर विकास को रेखांकित किया है।
5 जून 2026 को, DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने संस्थान में तीन अत्याधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं में एक अगली पीढ़ी का कृषि विस्तार शिक्षण केंद्र, एक प्रसंस्करण प्रयोगशाला और जलवायु लचीला हरित कृषि (CARIGAAR) लैब शामिल हैं। इसके अलावा, 25-27 फरवरी 2026 तक 'विकसित कृषि – आत्मनिर्भर भारत' विषय के तहत आयोजित 'पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026' में एक लाख से अधिक किसानों और कृषि उद्यमियों ने हिस्सा लिया, जैसा कि IARI के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने बताया।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
शिवराज सिंह चौहान ने 18 अगस्त 2026 को ICAR की 97वीं वार्षिक आम बैठक में बीज से लेकर वैश्विक बाजार तक कृषि प्रणालियों को मजबूत करने पर चर्चा की। इस संबंध में अधिक जानकारी
न्यूज़ ऑन एयर की रिपोर्ट में उपलब्ध है। संस्थान अनुसंधान और जन सेवा में सबसे आगे है, जिसकी हालिया पहलों में मिट्टी के स्वास्थ्य की शिक्षा के लिए 'खेत बचाओ अभियान' की घोषणा और मणिपुर से ए. फिस्टुलोसम की एक नई किस्म की रिपोर्टिंग शामिल है, जैसा कि
PIB की रिपोर्ट में बताया गया है।