दिल्ली में 1 अक्टूबर से सख्त पीयूसी अभियान: बिना वैलिड सर्टिफिकेट मिला तो लगेगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

दिल्ली सरकार ने एक अक्टूबर 2026 से बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण यानी पीयूसी सर्टिफिकेट के चलने वाले वाहनों के खिलाफ व्यापक प्रवर्तन अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत वैध दस्तावेज के बिना पाए जाने वाले वाहनों पर 10,000 रुपये तक का चालान लगाया जाएगा। मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत नियमों का पालन न करने पर तीन महीने तक के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने और छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार सभी स्थानों पर निगरानी कैमरे लगाकर पीयूसी केंद्रों की निगरानी और परिचालन विश्वसनीयता को बढ़ा रही है। इस प्रवर्तन रणनीति का एक केंद्रीय स्तंभ 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नीति का सख्त कार्यान्वयन है, जिसके तहत ईंधन स्टेशनों को वैध उत्सर्जन प्रमाण पत्र के बिना किसी भी वाहन को ईंधन देने से मना करना अनिवार्य किया गया है। यह नीति अब एक स्थायी, साल भर चलने वाला उपाय है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 115(7) के तहत अनुपालन आवश्यक है, जिसके तहत यह अनिवार्य किया गया है कि सभी मोटर वाहनों— जिनमें पेट्रोल, डीजल और सीएनजी मॉडल शामिल हैं— को प्रारंभिक पंजीकरण के एक वर्ष बाद एक वैध पीयूसी प्रमाण पत्र रखना होगा। इलेक्ट्रिक वाहन इन आवश्यकताओं से मुक्त हैं क्योंकि वे कोई टेलपाइप उत्सर्जन उत्पन्न नहीं करते हैं। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस इन प्रवर्तन प्रयासों का नेतृत्व करेंगे। साथ ही, सरकार परीक्षण क्षमताओं का विस्तार कर रही है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने हाल ही में बुराड़ी में एक नए स्वचालित परीक्षण स्टेशन का उद्घाटन किया, जो देश के सबसे बड़े स्टेशनों में से एक है, जिसकी वार्षिक क्षमता 40,000 भारी और 60,000 हल्के मोटर वाहनों का परीक्षण करने की है। ओखला और तेहखंड जैसी सुविधाएं सालाना लगभग 72,000 वाहनों का परीक्षण करने के लिए सुसज्जित हैं। ये स्टेशन ब्रेकिंग दक्षता, सस्पेंशन, हेडलाइट्स, साइड-स्लिप और उत्सर्जन स्तर की जांच सहित स्वचालित फिटनेस मूल्यांकन करते हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने आगे निर्देश दिया है कि 1 अक्टूबर से पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नीति लागू की जाए।