दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से भारी आर्थिक चपत, नुकसान का अनुमान 2000 करोड़ तक

देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था को भी गहरा जख्म दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 10 और 11 अक्टूबर 2026 को हुए इन प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के प्रमुख बाजारों और परिवहन सेवाओं को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए इन प्रदर्शनों ने व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह ठप कर दिया था।
आर्थिक नुकसान के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक वीडियो विश्लेषण के मुताबिक, इस सप्ताहांत में करीब 91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें दो दिनों तक शराब की बिक्री बंद रहने से 58.5 करोड़ रुपये, सदर बाजार से प्रतिदिन 28.125 करोड़ और कनॉट प्लेस के बाजारों से रोजाना 3.75 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है। वहीं, दिल्ली मेट्रो (DMRC) के 45 स्टेशनों के बंद होने से राजस्व में 50 लाख से 1.30 करोड़ रुपये की गिरावट आई।
व्यापारियों का दावा और सुरक्षा इंतजाम
हालांकि, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) के अनुमान इससे कहीं ज्यादा डराने वाले हैं। इन संगठनों का दावा है कि 10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस, जनपथ, खान मार्केट, चांदनी चौक और करोल बाग जैसे बड़े बाजारों के बंद होने से कुल नुकसान 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने जंतर मंतर के पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की थी। सुरक्षा के मद्देनजर जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के 4 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई थीं। डीसीपी सचिन शर्मा की देखरेख में कनॉट प्लेस में 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और पूरे मध्य दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया था।
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन की सख्ती पर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों ने "मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल" किया है। अदालत ने पुलिस को तुरंत बैरिकेड्स हटाने, इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और मेट्रो व ट्रेनों का संचालन सामान्य करने का निर्देश दिया।
कानूनी कार्रवाई की बात करें तो CJP के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरभ दास को निवारक हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान एक महिला के साथ मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है। दिवाली के करीब होने के कारण CTI ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे त्योहारों के सीजन में व्यापार को बचाने के लिए अब और प्रदर्शन न करें।