दिल्ली में आज भारी हलचल: चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और कोर्ट में अहम सुनवाई
दिल्ली में 'People Against SIR' का मार्च, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई आज।

देश की राजधानी दिल्ली आज एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों और कानूनी दांव-पेच की गवाह बनने जा रही है। 23 अक्टूबर 2026 को शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े विरोध मार्च और अदालती कार्यवाही तय हैं, जिसके चलते दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने कई इलाकों में पाबंदियां लगाई हैं।
सबसे बड़ा प्रदर्शन 'People Against SIR' नाम के एक गठबंधन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह समूह मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का विरोध कर रहा है। प्रदर्शनकारी दोपहर 1:00 बजे बंगला साहिब गुरुद्वारा, गोल डाक खाना और गोल मार्केट के पास इकट्ठा होंगे, जिसके बाद वे भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कार्यालय की ओर कूच करेंगे। उनकी मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और दोबारा पेपर बैलेट (कागजी मतपत्र) व्यवस्था लागू करने की है। इस प्रदर्शन में प्रकाश राज, प्रशांत भूषण, पराकला प्रभाकर और किसान नेता राकेश टिकैत जैसी बड़ी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।
सुरक्षा इंतजाम और कानूनी मामले
इन प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत बिना अनुमति के किसी भी तरह के जमावड़े या जुलूस पर रोक लगा दी गई है।
वहीं दूसरी ओर, कानूनी मोर्चे पर भी आज हलचल रहेगी। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रंका और सौरव दास को आज मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश होना है। ये दोनों पिछले कुछ समय से हिरासत में थे और 21 अक्टूबर को रिहा हुए थे। आज कोर्ट में उनके जमानत बॉन्ड और जमानत दस्तावेजों का औपचारिक सत्यापन किया जाएगा।
इसके साथ ही, दिल्ली हाई कोर्ट में शाम 6:00 बजे एक महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद है। यह मामला ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका से जुड़ा है। नेहा ने पुलिस द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का शांति बॉन्ड भरने को कहा गया था। यह नोटिस 16 अक्टूबर को 'लेहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन में शामिल होने के बाद दिया गया था। नेहा का तर्क है कि तिरंगा फहराना एक नागरिक अधिकार है, जबकि पुलिस इसे सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक निवारक कदम बता रही है।