दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों ने बिगाड़ा कारोबार, रोजाना 400 करोड़ का नुकसान

Kittu Kumari18 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों ने बिगाड़ा कारोबार, रोजाना 400 करोड़ का नुकसान

राजधानी दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों और नागरिक अशांति का सीधा असर अब शहर के व्यापारिक जगत पर पड़ने लगा है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, इन प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली के व्यापारिक लेनदेन को हर दिन 400 करोड़ रुपये से अधिक का जोखिम उठाना पड़ रहा है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो महज 10 दिनों में यह आर्थिक नुकसान 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

चांदनी चौक से भाजपा सांसद और CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली में औसतन रोजाना करीब 2,200 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, व्यापारिक गतिविधियों में महज 20 प्रतिशत की गिरावट आने से प्रतिदिन 440 करोड़ रुपये का जोखिम पैदा हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े उस व्यापारिक वॉल्यूम को दर्शाते हैं जो वर्तमान परिस्थितियों के कारण खतरे में है।

त्योहारी सीजन में गहराया संकट

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व्यापारियों के लिए अक्टूबर से जनवरी तक का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान दिवाली और शादियों के सीजन की वजह से देशभर में करीब 7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद रहती है। ऐसे में दिल्ली में सड़क जाम, मेट्रो सेवाओं में बाधा और सेंट्रल दिल्ली में प्रतिबंधों ने लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर की कमर तोड़ दी है। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने तो यहां तक बताया है कि भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों की बिक्री शून्य रही।

चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने चेतावनी दी है कि इस महीने अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अगर दिवाली तक अस्थिरता बनी रही, तो यह आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये को पार कर सकता है। कुछ व्यावसायिक इलाकों में तो ग्राहकों की संख्या में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखी गई है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन और ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन जैसे कई व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संपर्क किया है। व्यापारियों ने व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रदर्शनों पर औपचारिक प्रतिबंध लगाने और हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश ने दुकानदारों और छोटे विक्रेताओं की कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए कहा कि मुआवजे के मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए।

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