दिल्ली पुलिस के समन जारी रहने से प्रदर्शनकारियों में हड़कंप, महिलाओं को मिल रही धमकियां

दिल्ली-एनसीआर में केंद्र सरकार के आश्वासनों के बावजूद प्रदर्शनकारियों को लगातार परेशान किए जाने का मामला सामने आ रहा है। गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को भी दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजे जाने का सिलसिला जारी रहा, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है। कांग्रेस पार्टी के लीगल सेल के सदस्य ऋषभ रंजन के अनुसार, पार्टी द्वारा शुरू की गई हेल्पलाइन पर प्रदर्शन से जुड़े 300 कॉल आ चुके हैं। इस पूरी स्थिति में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं, आइए जानते हैं इसकी मुख्य बातें:
- समन जारी रहना: सरकार के वादों के बावजूद दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद लोगों को समन भेजना जारी है।
- धमकियों के मामले: कांग्रेस हेल्पलाइन पर 50 कॉल ऐसी युवतियों और महिलाओं की आईं जिन्हें प्रदर्शन में शामिल होने पर रेप और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
- मामले वापस लेने का आदेश: दिल्ली सरकार ने 30 जुलाई 2026 को प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी केस वापस लेने का आदेश जारी किया है।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को आदेश देकर सभी गिरफ्तार नाबालिगों की तुरंत रिहाई और छात्रों पर सख्त कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।
- संसद में हंगामा: लोकसभा में राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि मंत्री पीयूष गोयल ने फायरिंग के दावों को खारिज किया।
दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
दिल्ली सरकार ने 30 जुलाई 2026 को एक आदेश जारी कर सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की बात कही है। यह कदम केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह द्वारा 25 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के प्रतिनिधिमंडल को दिए गए आश्वासन के बाद उठाया गया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को अपने आदेश में सभी गिरफ्तार नाबालिगों को तुरंत छोड़ने और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई न करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और प्रदर्शनकारियों का डेटा सुरक्षित रखने के लिए भी कहा है।
लोकसभा में बहस और पुलिस का स्पष्टीकरण
इस मामले को लेकर बुधवार, 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में जोरदार बहस हुई। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरा। हालांकि, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसी दिन दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि मेडिकल रिकॉर्ड्स से महिला प्रदर्शनकारी को गोली लगने की बात साबित नहीं होती है, बल्कि उसे किसी भारी चीज से मामूली चोट ( lacerated wound ) आई थी। इसके साथ ही 30 जुलाई को आई रिपोर्ट्स में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न, डॉक्सिंग और धमकियों के मामले भी सामने आए हैं।