वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप: दिल्ली में भारी बवाल, 150 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में वोटर लिस्ट में कथित धोखाधड़ी को लेकर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। 16 अक्टूबर 2026 को 'लेहरा दो तिरंगा' आंदोलन के तहत सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया, जिसके बाद करीब 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू कर दी थी। पुलिस की इस कार्रवाई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके को उनके झंडेवालन स्थित आवास से और AISA की प्रमुख नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास से पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि अभिजीत डिपके को जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया है, जो एक हफ्ते में उनकी दूसरी हिरासत है। इससे पहले CJP के अन्य नेता आशुतोष रंका और सौरव दास को भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन के चलते पांच दिनों के लिए जेल जाना पड़ा था।
राजनीतिक टकराव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पुलिस की सख्ती और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद किए जाने के बावजूद प्रदर्शन जारी रहे। CPI(M) के राज्यसभा सांसदों जॉन ब्रिटास और वी. शिवदासन के नेतृत्व में SFI, DYFI और AIYF जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के आदेशों की अवहेलना की। यह पूरा विवाद चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' को लेकर है। जहां आयोग का दावा है कि यह मृत और फर्जी मतदाताओं को हटाने की एक वैध प्रक्रिया है, वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसके जरिए बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है।
इस घरेलू विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल दिखी। अमेरिकी कांग्रेस महिला प्रमिला जयपाल द्वारा भारतीय वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नामों को हटाने पर जताई गई चिंता को विदेश मंत्रालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने उनके बयानों को 'अनुचित और जानकारी विहीन' बताया। वहीं, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने इन प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर सरकार बदलने के लिए अराजकता फैलाने का आरोप लगाया, जिसे कांग्रेस ने लोकतंत्र की रक्षा का हिस्सा बताते हुए खारिज कर दिया।
इस बीच, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने मीडियाकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली, अहमदाबाद और पुणे में प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान तीन दर्जन से ज्यादा पत्रकारों को हिरासत में लिया गया और कुछ के साथ मारपीट भी की गई। दिल्ली के अलावा मुंबई के आजाद मैदान में भी प्रदर्शन हुए, जबकि बेंगलुरु में हाई कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए प्रशासन ने ऐसी रैलियों की अनुमति नहीं दी।