दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन से मचा हाहाकार, 5000 यात्रियों की छूटी ट्रेनें

देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब इंडिया गठबंधन के एक बड़े विरोध प्रदर्शन की वजह से सड़कों पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। इस भारी जाम का सबसे बुरा असर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पड़ा, जहां करीब 5,000 से ज्यादा यात्री अपनी निर्धारित ट्रेनें नहीं पकड़ सके और स्टेशन पर ही फंस गए।
यह विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कनॉट प्लेस में एक लंच मीटिंग के बाद राजघाट पर धरना दिया। यह पूरा प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था, जिन पर चुनावी हेरफेर और सरकार के दबाव में काम करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जाम की चपेट में आए यात्री और बंद हुए रास्ते
दोपहर 12 बजे के बाद दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक की स्थिति बदतर होने लगी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते, खासकर मिंटो ब्रिज, लगभग तीन घंटे तक पूरी तरह बंद रहे। इसके अलावा राजघाट और कनॉट प्लेस के आसपास भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए रात 10 बजे तक बसों और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का सहारा लेते हुए सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी लगा दी थी।
इस अव्यवस्था के कारण हजारों यात्रियों की यात्रा बाधित हुई। इनमें आईआईटी जोधपुर के 56 छात्र भी शामिल थे, जो शाम 4 बजे चलने वाली डिब्रुगढ़ राजधानी एक्सप्रेस नहीं पकड़ पाए। मुंबई राजधानी और कई वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के साथ-साथ लोकल ट्रेनों के यात्री भी इस जाम का शिकार हुए। IRCTC की ग्रुप बुकिंग वाले यात्री और बनारस, लखनऊ व बेंगलुरु जाने वाले लोग भी अपनी ट्रेनें मिस कर गए। हालात इतने खराब थे कि कई यात्रियों को अगली ट्रेन उपलब्ध न होने के कारण रात भर स्टेशन पर ही गुजारनी पड़ी।