चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में भारी प्रदर्शन, हजारों हिरासत में, शहर बना किला

देश की राजधानी दिल्ली शनिवार को उस समय जंग के मैदान में तब्दील हो गई, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), छात्र संगठनों और वामपंथी समूहों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुए इस प्रदर्शन ने पूरे मध्य दिल्ली को ठप कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों और फॉर्म 6 रजिस्ट्रेशन में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके बाद हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को भारी बल तैनात करना पड़ा।
पुलिस प्रशासन ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। जॉइंट सीपी नुपुर प्रसाद के मुताबिक, आवेदन देरी से दिया गया था और पिछले प्रदर्शनों के नियमों का उल्लंघन किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली को एक किले में तब्दील कर दिया गया, जहां 40 हजार से ज्यादा दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के जवानों को तैनात किया गया। ड्रोन से निगरानी रखी गई और शहर में 70 से ज्यादा बैरिकेडिंग की गई, जिससे गूगल मैप्स पर पूरा इलाका लाल नजर आया।
मेट्रो बंद, ट्रेनें रद्द और इंटरनेट सस्पेंड
सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने राजीव चौक और सेंट्रल സെക്രട്ടेरिएट जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों समेत करीब 45 से 57 स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दिए। रेलवे नेटवर्क भी इससे अछूता नहीं रहा; नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर आने वाली 250 से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी गईं। वहीं, शुक्रवार रात 10 बजे से ही जनपथ और कर्तव्य पथ के 4 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया था।
इस कार्रवाई के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं। CJP संस्थापक अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को एयरपोर्ट से ही हिरासत में ले लिया गया। वहीं, कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह और यूट्यूबर ध्रुव राठी को उनके घरों से उठाया गया। राजनीति के बड़े चेहरे भी इस कार्रवाई की चपेट में आए, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन शामिल थे।
पुलिस का दावा है कि दोपहर तक करीब 5,000 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि CJP का आरोप है कि देश भर में 10,000 लोगों को पकड़ा गया है। आकाशवाणी भवन के पास पथराव की घटनाएं भी हुईं, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। तनाव के कारण कनॉट प्लेस का बाजार पूरी तरह बंद रहा।
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने प्रतिबंधों के पैमाने की आलोचना करते हुए कहा कि "मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।" दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में इसे 'आपातकाल' से भी बदतर बताया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर 'लोकतंत्र की आवाज दबाने' का आरोप लगाया है।