CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन

देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जबरदस्त बवाल मचा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि न केवल ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए, बल्कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया को भी तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली हाट से शुरू होकर जंतर मंतर की ओर बढ़ा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस मार्च में आयसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण, स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के नेता दीपांकर भट्टाचार्य जैसे प्रमुख चेहरे नजर आए। प्रदर्शनकारी जमकर नारेबाजी कर रहे थे और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और 1500 से ज्यादा गिरफ्तार
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने अब तक के सबसे कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। जंतर मंतर इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी गई है और भारी बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF), आरएएफ (RAF) और बीएसएफ (BSF) के करीब 35,000 जवानों को तैनात किया गया है। तनाव को देखते हुए कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और शुक्रवार रात से शनिवार तक दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद रखा गया।
पुलिस की इस कार्रवाई में अब तक 1,500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। पकड़े गए लोगों में CJP नेता अभिजीतdeepcopy, आशुतोष रंका, सौरभ दास और आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय अपने समर्थकों के साथ शामिल हैं। इस बीच, प्रदर्शन के दौरान हिंसा की खबरें भी आईं, जहां पुलिस बस पर पथराव के दौरान एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गए।
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। आम आदमी पार्टी के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने इस मामले से दूरी बनाए रखी है। तृणमूल कांग्रेस का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- CEC ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई।
- SIR प्रक्रिया को रोकना और जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करना।
- चुनाव प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच।
- चुनाव आयुक्त नियुक्ति अधिनियम 2023 को रद्द करना।
नेहा बोरा ने इस आंदोलन को 'भारत छोड़ो आंदोलन' जैसा बताते हुए युवाओं से इसमें शामिल होने की अपील की है और साफ कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा।