दिल्ली में प्राइवेट स्कूल खोलना हुआ आसान, सरकार ने हटाए कई कड़े नियम

Kittu Kumari3 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में प्राइवेट स्कूल खोलना हुआ आसान, सरकार ने हटाए कई कड़े नियम

राजधानी दिल्ली में अब नए प्राइवेट स्कूल खोलना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली स्कूल शिक्षा (संशोधन) नियम, 2026' को अधिसूचित कर दिया है, जिससे स्कूलों की मान्यता और स्थापना की प्रक्रिया में आने वाली कई प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर दिया गया है। 30 सितंबर 2026 को गजट में प्रकाशित ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

इस नए बदलाव के बाद अब उन सोसायटियों और पब्लिक ट्रस्टों को बड़ी राहत मिलेगी जो निजी कमर्शियल जमीन पर स्कूल खोलना चाहते हैं। अब उन्हें 'पब्लिक-इंटरेस्ट असेसमेंट' यानी जनहित मूल्यांकन से नहीं गुजरना होगा। पहले नियम 44 के तहत प्रशासन यह जांच करता था कि उस खास इलाके में स्कूल की वाकई जरूरत है या नहीं। अगर प्रशासन को लगता था कि उस क्षेत्र में पहले से पर्याप्त स्कूल हैं, तो नए आवेदन खारिज कर दिए जाते थे। अब इस प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है।

इतना ही नहीं, नियम 50 के एक खास क्लॉज को भी हटा दिया गया है। अब आवेदकों को यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि इलाके में स्कूल की 'वास्तविक आवश्यकता' है या नए स्कूल के आने से पुराने मान्यता प्राप्त स्कूलों के नामांकन (enrollment) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

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किनके लिए अब भी जरूरी है सर्टिफिकेट?

हालांकि, यह ढील सभी के लिए नहीं है। अगर कोई स्कूल ऐसी संस्थागत जमीन पर खोला जा रहा है जो सरकार या नगर निगम से रियायती दर पर मिली है, या जिसे नीलामी के जरिए खरीदा गया है, तो उन्हें अभी भी उपराज्यपाल (LG) से 'एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट' (अनिवार्यता प्रमाण पत्र) लेना होगा। यह सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करेगा कि उस विशेष इलाके में स्कूल की जरूरत है।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस फैसले पर कहा कि सरकार का मकसद प्रशासनिक लालफीताशाही को कम करना और अधिक स्कूलों की स्थापना को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि अब प्रशासन 'सेल्फ-सर्टिफिकेशन' मॉडल की ओर बढ़ रहा है। अब फोकस इस बात पर होगा कि स्कूल में बुनियादी ढांचा (infrastructure), शिक्षकों की योग्यता और छात्र-शिक्षक अनुपात सही है या नहीं, न कि इस बात पर कि सरकार की नजर में वहां स्कूल की जरूरत है या नहीं।

अधिकारियों के मुताबिक, इन सुधारों का उद्देश्य दिल्ली के स्कूल मान्यता ढांचे को राष्ट्रीय शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के अनुरूप बनाना है, जो स्थानीय मांग के बजाय मानक मानदंडों को प्राथमिकता देता है।

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