दिल्ली प्रदूषण और डीपफेक के खतरों पर संसदीय समिति का बड़ा एक्शन

संसदीय समिति ने दिल्ली-NCR के प्रदूषण और डीपफेक तकनीक से बढ़ते खतरों को अपने 2026 के एजेंडे में शामिल किया है।

Kittu Kumari6 November 20262 min read0 viewsNational
दिल्ली प्रदूषण और डीपफेक के खतरों पर संसदीय समिति का बड़ा एक्शन

देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में गहराते प्रदूषण के संकट और डिजिटल दुनिया में बढ़ते डीपफेक के खतरों को देखते हुए गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने एक बड़ा कदम उठाया है। समिति ने इन दोनों गंभीर मुद्दों को अपने 2026 के मुख्य एजेंडे में शामिल कर लिया है, ताकि इनके समाधान के लिए ठोस राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे और नियमों पर विचार किया जा सके।

दिल्ली-NCR में हवा की बिगड़ती स्थिति अब चिंता का सबसे बड़ा विषय बन गई है। 5 नवंबर 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 तक पहुंच गया, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया। इस बिगड़ती स्थिति के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 6 नवंबर से पूरे दिल्ली-NCR में GRAP-3 प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। संसदीय समिति अब इस बात की समीक्षा करेगी कि ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के उपाय वास्तव में कितने प्रभावी रहे हैं।

डिजिटल धोखाधड़ी और AI का बढ़ता खतरा

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

प्रदूषण के साथ-साथ समिति का ध्यान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पैदा होने वाले खतरों पर है। विशेष रूप से डीपफेक तकनीक और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। समिति इस बात की जांच कर रही है कि कैसे ओपन-सोर्स AI टूल्स का गलत इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा सकता है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को क्या खतरा है।

यह कदम CERT-In द्वारा अक्टूबर 2026 में जारी उस एडवाइजरी के बाद आया है, जिसमें स्वायत्त AI एजेंटों द्वारा लाइव सिस्टम में अनधिकृत पहुंच और नए डिजिटल खतरों के प्रति आगाह किया गया था। इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने भी डीपफेक और ऑटोमेटेड पहचान धोखाधड़ी को नियामक निगरानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया था।

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पहले ही कड़े कदम उठाए हैं। 1 नवंबर 2026 से बाहरी निर्माण और विध्वंस कार्यों पर रोक लगा दी गई थी और निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया था। अब संसदीय समिति की समीक्षा से उम्मीद है कि इन समस्याओं से निपटने के लिए और अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक नीतियां बनाई जाएंगी।

Share:

Comments

Leave a comment