दिल्ली सरकार का बड़ा एक्शन: 40 हॉटस्पॉट्स पर प्रदूषण घटाने के लिए खर्च करेगी 104 करोड़

राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों में बढ़ने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। सरकार ने शहर के 40 सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाकों (हॉटस्पॉट्स) को चिह्नित किया है, जहां प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए 104 करोड़ रुपये का एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है। इस पूरी योजना की कमान दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को सौंपी गई है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि सरकार ने इसमें प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स को शामिल किया है। इन कंपनियों को ऐसी तकनीक लगानी होगी जिससे चिह्नित स्थलों पर PM10 और PM2.5 के स्तर में कम से कम 20% की गिरावट आए। दिलचस्प बात यह है कि कंपनियों को सिर्फ मशीनें लगाने के पैसे नहीं मिलेंगे, बल्कि भुगतान तभी किया जाएगा जब वे प्रदूषण कम करने का तय लक्ष्य हासिल कर लेंगी।
कैसे काम करेगा यह प्रदूषण नियंत्रण मॉडल?
इस योजना के तहत कुल 40 अलग-अलग समझौते किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की कीमत करीब 2.6 करोड़ रुपये होगी। कंपनियों को आउटडोर एयर प्यूरीफायर, मिस्ट-बेस्ड स्क्रबर्स और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति है। हालांकि, शर्त यह है कि ये सभी उपकरण सरकारी लैब से प्रमाणित होने चाहिए और इनसे शोर या ओजोन उत्सर्जन जैसा कोई दूसरा खतरा पैदा नहीं होना चाहिए।
यह पहल 20 अक्टूबर 2026 को घोषित 'विंटर एक्शन प्लान' का हिस्सा है। इसके लिए ई-टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आवेदन की आखिरी तारीख 23 अक्टूबर 2026 तय की गई है। जिन ऑपरेटरों का चयन होगा, उन्हें साइट मिलने के चार हफ्ते के भीतर सिस्टम इंस्टॉल करना होगा। यह पायलट प्रोजेक्ट एक साल तक चलेगा।
अगर लोकेशन की बात करें, तो यह योजना मुख्य रूप से बाजारों, कमर्शियल इलाकों, ट्रांसपोर्ट हब और अस्पतालों पर केंद्रित है। इनमें से लगभग 48% साइट्स दक्षिण और मध्य दिल्ली में स्थित हैं। टेंडर के लिए कंपनियों का पिछले तीन वर्षों का औसत सालाना टर्नओवर कम से कम 1 करोड़ रुपये होना चाहिए, हालांकि तकनीकी योग्यता रखने वाले स्टार्टअप्स को इसमें कुछ छूट दी जा सकती है।
सरकार की इस रणनीति में 'नो PUC, नो फ्यूल' जैसी नीतियां और निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी जैसे कदम भी शामिल हैं, ताकि दिल्ली की हवा को फिर से सांस लेने लायक बनाया जा सके।