दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ी सख्ती: रोजाना कट रहे 10 हजार से ज्यादा चालान
सर्दियों से पहले दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए सख्ती बढ़ गई है। ट्रैफिक पुलिस रोजाना 10 हजार से ज्यादा चालान काट रही है।

सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली सरकार और प्रशासन ने कमर कस ली है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने हाल ही में ट्रैफिक पुलिस और पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल मीटिंग की, जिसमें प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नकेल कसने की रणनीति तैयार की गई।
मीटिंग के दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। अधिकारियों ने बताया कि शहर में ट्रैफिक और प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है और वर्तमान में रोजाना 10,000 से अधिक चालान काटे जा रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन वाहनों को रोकना है जो उत्सर्जन मानकों (emission standards) को पूरा नहीं करते और शहर की हवा को और जहरीला बना रहे हैं।
बॉर्डरों पर सख्ती और GRAP-1 लागू
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और बहादुरगढ़ के अधिकारियों को भी अलर्ट किया गया है। बैठक में यह तय हुआ कि दिल्ली की सीमाओं पर ट्रैफिक जाम को कम किया जाएगा और प्रदूषण फैलाने वाली बसों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। अब दिल्ली-NCR में चलने वाली बसों के लिए बिजली, CNG या BS-VI डीजल इंजन होना अनिवार्य है। इसके अलावा, पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी और दिल्ली न जाने वाले ट्रकों को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ा जाएगा।
प्रशासन ने केवल वाहनों पर ही नहीं, बल्कि धूल नियंत्रण के लिए भी कदम उठाए हैं। सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी के छिड़काव का काम तेज किया जा रहा है। गौरतलब है कि हवा की गिरती गुणवत्ता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर से GRAP के पहले चरण (Stage 1) को लागू कर दिया है।
एक तरफ हवा जहरीली हो रही है, वहीं दूसरी तरफ यमुना नदी में कालिंदी कुंज के पास फिर से सफेद जहरीला झाग देखा गया है, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी चेतावनी है। वर्तमान में दिल्ली का औसत AQI 168 के आसपास है, जो 'अनहेल्दी' श्रेणी में आता है। शहर के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर 110 से लेकर 180 के बीच दर्ज किया गया है, जिसमें PM2.5 और PM10 मुख्य प्रदूषक बने हुए हैं।