डिजिटल अरेस्ट एक खतरनाक ठगी है: दिल्ली पुलिस ने दी चेतावनी, भूलकर भी न दें पैसे

दिल्ली पुलिस ने 25 सितंबर 2026 को आधिकारिक संचार के माध्यम से जनता के लिए एक चेतावनी जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल अरेस्ट पूरी तरह से साइबर अपराधियों द्वारा किया जाने वाला एक धोखा है और भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस ने जोर देकर कहा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए गिरफ्तारियां नहीं करती हैं और न ही पैसों की मांग करती हैं। अधिकारियों ने नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी है।
शिकायत दर्ज करने के निर्देश
यदि किसी को भी कानून प्रवर्तन या अन्य आधिकारिक निकायों का दावा करने वाला कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह चेतावनी #DPUpdates और #HelloPoliceStation के साथ गृह मंत्रालय, दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, साइबर दोस्त और माईगव इंडिया के सहयोग से जारी की गई है।
हालिया मामले और कानूनी कार्रवाई
यह चेतावनी हालिया साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं के बाद आई है। इसमें पुणे के एक जोड़े द्वारा डिजिटल अरेस्ट घोटाले में 76.22 लाख रुपये गंवाने का मामला और दिल्ली के पीतमपुरा में एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ शामिल है, जिसके चलते 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इसके अलावा, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) दुर्भावनापूर्ण डेटाबेस को चिह्नित करके ऐसे आपराधिक बुनियादी ढांचे से मुकाबला कर रहा है। अगस्त 2026 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी सरकार को डिजिटल अरेस्ट को एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने पर विचार करने के लिए सक्रिय निर्देश जारी किए और वित्तीय संस्थानों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं स्थापित करने का आदेश दिया ताकि पीड़ितों के लिए धन की रिकवरी में सुधार किया जा सके। इस संबंध में अधिक जानकारी cybercrime.gov.in/Webform/daily-digest.aspx पर उपलब्ध है।