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Delhi Police के दावों पर उठे गंभीर सवाल, कोर्ट में वकील की दलील और पुलिस के बयान में बड़ा विरोधाभास

Kittu Kumari30 July 20263 min read22 views
Delhi Police के दावों पर उठे गंभीर सवाल, कोर्ट में वकील की दलील और पुलिस के बयान में बड़ा विरोधाभास

दिल्ली पुलिस इस समय बड़ी मुश्किल में फंस गई है क्योंकि कस्टडी में मौजूद एक पत्थर से लदे ट्रक (Registration Number HR63 E 6865) को लेकर उसके सार्वजनिक बयानों और दिल्ली हाईकोर्ट में उसके वकील की दलीलों में पूरी तरह से विरोधाभास सामने आया है। पुलिस ने खुद पुष्टि की थी कि यह ट्रक 16 जुलाई 2026 से उसकी गिरफ्त में है, लेकिन इसके बावजूद इसे लेकर अदालत में अलग ही तर्क दिए गए। इस पूरे मामले ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता के बीच भी काफी चर्चा हो रही है।

  • 16 जुलाई को सड़क हादसे के बाद पुलिस ने पकड़ा था पत्थर से लदा ट्रक (FIR No. 65/2026)।
  • कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान 20 जुलाई को जंतर-मंतर के पास दिखा था यह वाहन।
  • दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ASG S.V. Raju ने इसे प्रदर्शनकारियों की साजिश से जोड़ा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों पर punitive action पर रोक लगाई और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने को कहा।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद और क्या है ट्रक का सच

यह सारा मामला तब शुरू हुआ जब 16 जुलाई को फिरोज शाह रोड और कस्तूरबा गांधी मार्ग क्रॉसिंग पर एक मारुति ईको वैन के साथ सड़क हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इस ट्रक को जब्त किया था। इस एक्सीडेंट में छह से सात लोग घायल हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने FIR नंबर 65/2026 दर्ज की थी। इसके बाद 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान यही वाहन जंतर-मंतर के पास देखा गया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि इस ट्रक को उन्हें फंसाने या हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर वहां खड़ा किया गया था, और उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कड़े सुरक्षा घेरे को पार करके यह गाड़ी वहां तक कैसे पहुंच गई।

पुलिस की सफाई और हाईकोर्ट में सरकारी वकील की दलील

अपनी सफाई में दिल्ली पुलिस ने पहले इन आरोपों को 'फर्जी और भ्रामक' बताया था और कहा था कि जब्त वाहनों के लिए जगह की कमी के कारण इस ट्रक को शुरुआत में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के पास खड़ा किया गया था। इसके बाद मालिक के निर्देश पर इसे 20 जुलाई की सुबह वहां से हटा लिया गया था। हालांकि, 22 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती के मामलों की सुनवाई के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने प्रदर्शनकारियों की याचिकाओं का विरोध करते हुए इसी ट्रक का हवाला दिया और कहा कि याचिकाकर्ता 'तथ्यों को छिपा रहे हैं' और सोशल मीडिया की असत्य जानकारियों के आधार पर आरोप लगा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिला कि प्रदर्शनकारियों ने ही ये पत्थर मंगवाए थे।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और भारत संघ को चार हफ्ते के भीतर अपने काउंटर-एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की गई है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में भी CJP के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई (punitive action) पर रोक लगा दी है और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं, जबकि तीन जजों की बेंच ने पुलिस एक्शन की स्वतंत्र जांच के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ देखा है।

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