दिल्ली पुलिस की चेतावनी: किरायेदारों का वेरिफिकेशन है जरूरी, लापरवाही पर होगी जेल

दिल्ली पुलिस ने मकान मालिकों को किरायेदार वेरिफिकेशन अनिवार्य करने और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने की सलाह दी है।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली पुलिस की चेतावनी: किरायेदारों का वेरिफिकेशन है जरूरी, लापरवाही पर होगी जेल

राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए एक सार्वजनिक सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए साफ कहा है कि शहर की सुरक्षा में आम जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि वे अपने आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें और तुरंत इसकी सूचना दें।

पुलिस ने बताया कि किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी के लिए लोग पीसीआर हेल्पलाइन 112 और 'आइज एंड इयर्स' हेल्पलाइन 14547 का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मुहिम का मकसद अपराधों पर लगाम लगाना और मोहल्लों को सुरक्षित बनाना है।

किरायेदारों का वेरिफिकेशन न कराने पर होगी कानूनी कार्रवाई

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दिल्ली पुलिस ने विशेष रूप से मकान मालिकों को चेतावनी दी है कि वे अपने किरायेदारों का वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराएं। यह केवल एक सलाह नहीं बल्कि कानूनी बाध्यता है। पुलिस के अनुसार, सीआरपीसी की धारा 144 और आईपीसी की धारा 188 के तहत मकान मालिकों के लिए अपने किरायेदारों की पहचान स्थानीय अधिकारियों को बताना जरूरी है।

अगर कोई मकान मालिक इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है और एक महीने तक की जेल भी हो सकती है। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब कोई बिना वेरिफिकेशन वाला किरायेदार किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाता है, ऐसी स्थिति में मकान मालिक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन सुविधा भी दी है। मकान मालिक delhipolice.gov.in पोर्टल पर जाकर 'फॉर्म सी' भर सकते हैं। किरायेदार के घर आने के 24 घंटे के भीतर यह जानकारी देना जरूरी है। इसके लिए आधार कार्ड और रेंट एग्रीमेंट जैसे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं जानते, वे फॉर्म डाउनलोड कर अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जमा कर सकते हैं।

पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा के नेतृत्व में यह सामुदायिक पुलिसिंग रणनीति अपनाई जा रही है, जिसमें रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन को पुलिस की 'आंख और कान' बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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