JNU यौन उत्पीड़न मामला: कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल को दिल्ली पुलिस का समन

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने अब इस मामले में आधिकारिक तौर पर उन्हें नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए बुलाया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत उन्हें पुलिस स्टेशन पहुंचकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है, जिसके लिए गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 का समय तय किया गया है।
यह पूरी कार्रवाई वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में 11 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई एक एफआईआर (FIR) के बाद शुरू हुई है। यह शिकायत जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
11 छात्राओं ने लगाए थे गंभीर आरोप
मामले की जड़ मई 2026 में है, जब यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स के पूर्व प्रोफेसर रहे अंगोमचा बिमोल अकोईजम के खिलाफ कम से कम 11 महिला छात्राओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने इस मामले की गहन जांच की और पाया कि लगाए गए आरोप सही हैं। समिति ने उनके खिलाफ कड़ी सजा की सिफारिश की थी, जिसके बाद कुलपति संतोष्री डी पंडित ने 9 अक्टूबर 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। भाजपा महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 13 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
दूसरी ओर, इनर मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को एक "विच हंट" (राजनीतिक साजिश) करार दिया है और यूनिवर्सिटी की आंतरिक जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (JNUTA) ने भी बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि कुलपति ने कार्यकारी परिषद की मंजूरी के बिना यह कदम उठाया और जांच की गोपनीय जानकारी मीडिया में लीक की गई।