विरोध प्रदर्शन की चेतावनी: दिल्ली पुलिस ने मांगी 273 CAPF कंपनियों की अतिरिक्त तैनाती

राजधानी में संभावित विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है। दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुरोध किया है कि शहर में तैनात 273 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) कंपनियों की अवधि को 20 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दिया जाए। यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य एक्टिविस्ट समूहों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों की धमकी के बाद उठाया गया है।
संवेदनशील इलाकों पर कड़ी नजर और प्रतिबंध
सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के कई इलाकों को बेहद संवेदनशील माना है। इनमें जंतर मंतर, चुनाव आयोग का कार्यालय, संसद भवन, इंडिया गेट और सरकारी मंत्रियों के आवास व कार्यालय शामिल हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने जंतर मंतर पर जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब प्रदर्शनों के लिए केवल रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को ही निर्धारित किया गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि इन प्रदर्शनों के कारण शहर के 22 प्रमुख रूटों पर ट्रैफिक जाम लग सकता है, जिससे आम जनता को परेशानी होगी।
इस पूरे विवाद की जड़ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) है, जिसकी स्थापना 16 मई, 2026 को अभिजीत डिपके ने की थी। यह पार्टी मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को नहीं मानेगी।
तनाव इतना बढ़ गया है कि 12 अक्टूबर को अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को निवारक हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 13 अक्टूबर को जब सौरव दास और आशुतोष रंका जंतर मंतर की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें फिर से हिरासत में ले लिया। वहीं, 12 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत चार एफआईआर दर्ज की हैं, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अनुमति और निषेधाज्ञा के आदेशों का उल्लंघन किया था।