CJP विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली में सुरक्षा सख्त, जंतर मंतर अब भी सील

Kittu Kumari11 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
CJP विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली में सुरक्षा सख्त, जंतर मंतर अब भी सील

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के बाद माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है। 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली के इलाकों में सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों का जमावड़ा होने पर उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा। जंतर मंतर को पूरी तरह सील कर दिया गया है और शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों पर भारी पुलिस बल के साथ बैरिकेडिंग की गई है।

यह पूरी गहमागहमी 10 अक्टूबर को शुरू हुई, जब पुलिस ने समय की कमी और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए CJP की रैली की अनुमति खारिज कर दी थी। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है, क्योंकि पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया केवल मतदाता सूचियों को सटीक बनाने के लिए की गई थी।

हजारों की हिरासत और शहर में अफरा-तफरी

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स्थिति को बिगड़ते देख केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही राज्यों को निर्देश दिए थे कि प्रदर्शनकारियों को दिल्ली आने से रोका जाए। 10 अक्टूबर को जब हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, तो पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मोर्चा संभाला और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, वरिष्ठ नेता सौरव दास, आशुतोष रंका, छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा और अर्थशास्त्री जीन द्रेज शामिल थे।

प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के पास पत्थरबाजी और झड़पें भी हुईं, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से 46 मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा था। हालांकि, अब मेट्रो और रेल सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी के बाद अब अजिंक्य शिंदे ने आंदोलन की कमान संभाली है और प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया है।

रिहाई की बात करें तो, 11 अक्टूबर को अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद रिहा किया गया। उन्हें 50,000 रुपये का मुचलका भरने और एक साल तक शांति बनाए रखने का वचन देने के बाद छोड़ा गया। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में बड़े पैमाने पर की गई इन गिरफ्तारियों और सार्वजनिक परिवहन बंद करने की वैधता को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर अब सुनवाई होनी है।

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