जुलाई जैसी स्थिति न हो, इसलिए अक्टूबर में लगाई धारा 163: सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जुलाई जैसी कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए अक्टूबर में धारा 163 लागू की गई थी।

Kittu Kumari3 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
जुलाई जैसी स्थिति न हो, इसलिए अक्टूबर में लगाई धारा 163: सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को एक हलफनामा सौंपकर यह स्पष्ट किया है कि राजधानी के कई इलाकों में अक्टूबर के दौरान विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी लगाने का फैसला कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लिया गया था। पुलिस का कहना है कि इस साल जुलाई में NEET पेपर लीक के दौरान हुए प्रदर्शनों में जिस तरह की स्थितियां बनी थीं, उन्हें दोबारा होने से रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू करना जरूरी था।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने अदालत को बताया कि नई दिल्ली जिला बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यहाँ संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट और जंतर मंतर जैसे महत्वपूर्ण स्थान हैं। पुलिस के मुताबिक, अगर भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जाता, तो इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका थी। यह पूरा मामला सीपीआई(एम) नेता एम.ए. बेबी की एक याचिका के बाद सामने आया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा था।

इन इलाकों में रही पाबंदी और ये थे कारण

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पुलिस ने अदालत के सामने सात अलग-अलग आदेश पेश किए हैं, जिनमें कनॉट प्लेस, तुगलक रोड, पार्लियामेंट स्ट्रीट, चाणक्यपुरी, बाराखंबा रोड, सफदरजंग एन्क्लेव और डिफेंस कॉलोनी जैसे इलाके शामिल हैं। इन आदेशों के जरिए पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, नारेबाजी करने, भाषण देने और बैनर-पोस्टर या लाठियां ले जाने पर रोक लगाई गई थी।

पुलिस ने तर्क दिया कि ये पाबंदियां पूरे शहर में एक साथ नहीं लगाई गईं, बल्कि अलग-अलग उप-मंडलों की स्थिति देखकर तय की गईं। उदाहरण के तौर पर:

  • कनॉट प्लेस: यहाँ भारी भीड़ और ट्रैफिक रहता है, इसलिए सुरक्षा और सुचारू आवाजाही के लिए प्रतिबंध लगाए गए।
  • तुगलक रोड: यहाँ इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और विदेशी दूतावास स्थित हैं, इसलिए भारी वाहनों (ट्रक-ट्रैक्टर) और बिना अनुमति सभाओं पर रोक लगाई गई।
  • पार्लियामेंट स्ट्रीट और चाणक्यपुरी: इन क्षेत्रों की संवेदनशीलता और प्रधानमंत्री आवास व राष्ट्रपति भवन की मौजूदगी के कारण कड़े इंतजाम किए गए।

हलफनामे में साफ किया गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर धरना या प्रदर्शन के लिए लिखित अनुमति लेना अनिवार्य था, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।

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