दिल्ली में पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराने और धमकाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद अधिकारियों ने जरूरी सुरक्षा गाइडलाइंस जारी की हैं। यह आपराधिक मामला तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया जब दक्षिण दिल्ली के आस्थ कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित बलात्कार की घटना सामने आई, जिसके बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। फर्जी पुलिसकर्मी लोगों को डराने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और अक्सर समूहों में घूमकर एक-दूसरे को 'सर' या 'जनाब' कहकर झूठा अधिकार जताते हैं।
ये अपराधी अक्सर सादे कपड़ों में पीड़ितों के पास आते हैं और खुद को विशेष जांच इकाइयों का सदस्य बताते हैं। वे पीड़ितों को गिरफ्तारी, कानूनी वारंट या नाबालिग होने पर माता-पिता को सूचना देने की धमकी देते हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि हालांकि कुछ विशेष जांच इकाइयां सादे कपड़ों में काम करती हैं, लेकिन पार्कों जैसी सार्वजनिक जगहों पर नियमित ड्यूटी पर मौजूद असली पुलिसकर्मी हमेशा वर्दी में होने चाहिए।
नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति से आधिकारिक पहचान पत्र मांगें जो खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताता है, भले ही उसने वर्दी पहनी हो।
किसी भी संदेह या उत्पीड़न की स्थिति में लोगों को तुरंत 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करना चाहिए।
मौखिक बात न हो पाने की स्थिति में लाइव लोकेशन भेजने के लिए फोन-आधारित SOS फीचर्स या पैनिक बटन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। मुख्य रक्षा रणनीतियों में आत्मविश्वास बनाए रखना, ध्यान आकर्षित करने के लिए चिल्लाना और भीड़भाड़ वाली या रोशनी वाली जगहों पर जाना शामिल है।
पुलिस पार्कों में बिना किसी वैध कारण के जोड़ों से पूछताछ नहीं कर सकती है। असली अधिकारी हमेशा अपनी एजेंसी और उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताएंगे और कभी भी पैसे, बैंक ट्रांसफर या व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी की मांग नहीं करेंगे। सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार,
वास्तविक अधिकारियों के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है, यदि संदेह हो तो पूछें और सत्यापित करें। ऐसे मामलों से बचने के लिए आधिकारिक दिल्ली पुलिस के बिल्ले से पहचान की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।