MCOCA केस में 6 साल तक गिरफ्तारी नहीं, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकारा, कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट

दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत दर्ज मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर दिल्ली पुलिस के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि इतने कड़े कानून के बावजूद पुलिस छह साल तक दो आरोपियों, मुकेश उर्फ पुनीत और प्रदीप उर्फ गुरी को गिरफ्तार करने में नाकाम रही। इस दौरान आरोपी खुलेआम घूमते रहे और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में शामिल रहे।
राउज एवेन्यू कॉम्प्लेक्स की स्पेशल कोर्ट (MCOCA) ने स्पष्ट किया कि पुलिस की इस लापरवाही ने MCOCA कानून के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर दिया है। जज गौरव राव ने कहा कि जब आरोपियों के खिलाफ इतना सख्त कानून लगाया गया था, तो उन्हें छह साल तक गिरफ्तार न करना समझ से परे है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश की कॉपी दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजने का निर्देश दिया है ताकि दोषी अधिकारियों और जांच अधिकारियों (IOs) के खिलाफ विस्तृत जांच कर उचित कार्रवाई की जा सके।
'बेस्ट एफर्ट्स' के दावे को कोर्ट ने बताया मजाक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एडिशनल डीसीपी (आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट) द्वारा पेश की गई रिपोर्ट की कड़ी आलोचना की। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 'बेहतरीन प्रयास' (Best Efforts) किए गए थे। कोर्ट ने इस दावे को 'मजाक' करार देते हुए कहा कि छह साल का समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों का आजाद रहना यह दर्शाता है कि पुलिस प्रशासन कितना लापरवाह रहा है।
कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस की इस सुस्त कार्यप्रणाली की वजह से अपराधियों को और अधिक अपराध करने का मौका मिला, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा। जज ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि संबंधित अधिकारी न तो अदालत के प्रति जवाबदेह महसूस करते हैं और न ही आम जनता के प्रति।
अदालत ने यह भी गौर किया कि इस पूरे मामले में केवल एसीपी राकेश कुमार ने ही सही दिशा में प्रयास किए, जबकि अन्य जांच अधिकारियों के पास मामला लंबे समय तक रहा लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कोर्ट ने अब अगली सुनवाई पर जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।