जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन का केंद्र नहीं, दिल्ली पुलिस ने तय किए 3 नए ठिकाने

Kittu Kumari13 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन का केंद्र नहीं, दिल्ली पुलिस ने तय किए 3 नए ठिकाने

देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र रहा जंतर मंतर अब आधिकारिक तौर पर इस सूची से बाहर हो गया है। दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए जंतर मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा 11 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, अब प्रदर्शनकारियों को शहर के अन्य हिस्सों में जाना होगा।

यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के बाद उठाया गया है। समिति का मानना था कि मध्य दिल्ली में भीड़भाड़ बहुत बढ़ गई है, जिससे यातायात और आम जनता को परेशानी होती है। दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुरूप है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के लिए बेहतर सुविधाओं और उपयुक्त स्थानों की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। कोर्ट ने यह भी माना कि मध्य दिल्ली में बुनियादी सुविधाओं की कमी है।

प्रदर्शन के लिए चुने गए तीन नए मैदान

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जंतर मंतर की जगह अब पुलिस ने तीन नए स्थानों को चिन्हित किया है, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं:

  • रामलीला मैदान: यह जंतर मंतर से करीब 4 किलोमीटर दूर है।
  • बुराड़ी ग्राउंड: यह केंद्र से 15 से 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
  • CBD ग्राउंड: पूर्वी दिल्ली में स्थित यह मैदान जंतर मंतर से लगभग 13-14 किलोमीटर दूर है।

पुलिस ने साफ किया है कि इन नए स्थलों के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जल्द ही जारी किए जाएंगे। हालांकि, इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों और नागरिक समाज में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सरकार के इस कदम को "अत्यधिक घबराहट" का संकेत बताया है। वहीं, कई कार्यकर्ताओं का तर्क है कि प्रदर्शन स्थलों को संसद और सरकारी दफ्तरों से दूर करने का मकसद नेताओं तक अपनी बात पहुँचाने की क्षमता को कम करना है।

इस विवाद के बीच तनाव तब बढ़ गया जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता सौरभ दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे ने जंतर मंतर में प्रवेश की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके वकीलों का आरोप है कि हिरासत के दौरान उन्हें कानूनी सहायता नहीं दी गई और उनके फोन जब्त कर लिए गए।

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन INDIA के सांसदों, नागरिक समाज के सदस्यों और छात्र संगठनों (AISA और SFI) को एक साझा रणनीति बनाने के लिए आमंत्रित किया है। फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट 15 अक्टूबर 2026 को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा।

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