जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं, दिल्ली पुलिस ने बदला नियम

देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 33 सालों से चली आ रही एक परंपरा अब खत्म हो गई है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक औपचारिक आदेश जारी कर जंतर मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। यह बड़ा फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। अब जंतर मंतर के बजाय प्रदर्शनकारियों के लिए रामलीला मैदान, बुरारी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए आधिकारिक स्थलों के रूप में नामित किया गया है।
इस फैसले के बाद शहर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने शहरी भीड़भाड़ कम होने की उम्मीद में इस कदम का स्वागत किया है, वहीं अन्य व्यापारिक संगठनों में भारी नाराजगी है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMTGTA) ने रामलीला मैदान को प्रदर्शन स्थल बनाने का कड़ा विरोध किया है।
व्यापारियों को डर, दिवाली सीजन में होगा करोड़ों का नुकसान
व्यापारियों का मानना है कि रामलीला मैदान जैसे व्यस्त इलाके में प्रदर्शन होने से पुरानी दिल्ली के मुख्य बाजारों में कामकाज ठप हो जाएगा। CTI ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को हुए हालिया प्रदर्शनों की वजह से उन्हें करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। व्यापारियों ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे दिवाली के त्यौहार के बाद ही प्रदर्शन करें ताकि व्यापार प्रभावित न हो। इसके अलावा, रामलीला मैदान की उपलब्धता पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह मैदान साल के अधिकांश समय पहले से बुक रहता है और दिसंबर के अंत तक यहां जगह मिलना मुश्किल है।
सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। इसी कड़ी में 12 अक्टूबर को पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, सेंट्रल സെക്രട്ടेरिएट और बाराखंभा रोड जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया। पुलिस ने 10 अक्टूबर को उनके अगले प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। अब इस पूरे मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, जहां 13 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बिना किसी ठोस विकल्प के जंतर मंतर को बंद करना अभिव्यक्ति की आजादी का हनन है। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी की जा रही है।