जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शनों का अड्डा नहीं, दिल्ली पुलिस ने बदला नियम

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शनों का अड्डा नहीं, दिल्ली पुलिस ने बदला नियम

राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित जंतर मंतर, जो पिछले तीन दशकों से जनता की आवाज और विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है, अब आधिकारिक तौर पर प्रदर्शनों की सूची से बाहर हो गया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को एक स्थायी आदेश जारी करते हुए जंतर मंतर को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटा दिया है। यह फैसला 28 अप्रैल 2022 के पुराने आदेश में बदलाव करते हुए लिया गया है।

गौरतलब है कि 1990 के दशक से ही जंतर मंतर रोड का इस्तेमाल सार्वजनिक असंतोष जताने के लिए किया जाता रहा है, क्योंकि इंडिया गेट और बोट क्लब जैसे इलाकों में भीड़ जमा होने पर पाबंदी थी। अब लुटियंस जोन में भीड़भाड़ कम करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदर्शनों को शहर के अन्य हिस्सों में शिफ्ट किया जा रहा है।

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गृह मंत्रालय के अधीन एक समिति की सिफारिशों के बाद, प्रशासन ने जंतर मंतर के विकल्प के तौर पर शहर में तीन अलग-अलग मैदानों की पहचान की है। अब प्रदर्शनकारियों को इन जगहों पर जाना होगा:

  • रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली में स्थित।
  • बुरारी ग्राउंड: उत्तर दिल्ली का क्षेत्र।
  • CBD ग्राउंड: शाहदरा इलाके में स्थित पूर्वी दिल्ली का मैदान।

हालांकि, यह बदलाव कई सवाल भी खड़े कर रहा है। आलोचकों का मानना है कि संसद और प्रमुख सरकारी मंत्रालयों से दूर होने के कारण प्रदर्शनकारियों की आवाज सरकार तक उतनी प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाएगी। फिलहाल, नागरिक समाज और प्रदर्शनकारी समूहों को नए 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) का इंतजार है, जिससे यह साफ हो सके कि इन मैदानों के इस्तेमाल के नियम क्या होंगे।

यह प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' और 'INDIA' गठबंधन जैसे समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी रोल में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश शांतिपूर्ण सभाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अब आयोजकों को नए स्थानों के लिए अलग सुरक्षा और सुविधाओं के साथ तालमेल बिठाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में 9 अक्टूबर 2026 के आसपास यह टिप्पणी की थी कि वैकल्पिक स्थलों पर प्रदर्शनकारियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। अब सबकी नजरें पुलिस द्वारा जारी की जाने वाली नई गाइडलाइंस पर हैं, जिसमें ध्वनि उपकरणों और प्रतिभागियों की संख्या जैसे नियमों का जिक्र होगा।

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