राहुल गांधी की रैली में फायरिंग की अफवाह फैलाने वालों पर एक्शन, दिल्ली पुलिस ने हटवाए 300 पोस्ट

राजधानी में अफवाहों के जरिए तनाव पैदा करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे उन करीब 300 पोस्ट्स को हटवाया है, जिनमें राहुल गांधी की एक रैली में फायरिंग होने और पांच लोगों की मौत होने का झूठा दावा किया गया था। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी भ्रामक सामग्री को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि शहर की शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।
यह कार्रवाई केवल पोस्ट हटाने तक सीमित नहीं है। इससे पहले 8 अक्टूबर को भी पुलिस ने 11 भ्रामक वीडियो और पोस्ट पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए थे। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (IFSO) ने आईटी एक्ट 2000 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर तीन घंटे के भीतर ऐसी सामग्री हटाने को कहा था। पुलिस का मानना है कि पुराने फुटेज, दूसरे राज्यों के वीडियो और AI द्वारा बनाए गए फर्जी कंटेंट का इस्तेमाल लोगों को भड़काने के लिए किया जा रहा है।
फर्जी वीडियो बनाने वाला गिरफ्तार, जंतर मंतर पर प्रदर्शन प्रतिबंधित
इस मामले में पुलिस ने कड़ी कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। 24 वर्षीय नदीम अहमद को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारी द्वारा यौन शोषण का फर्जी AI वीडियो फैलाने का आरोप है। इसके अलावा, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आयोजकों, जिनमें अभिजीत डिपके, सौरभ दास और आशुतोष रंका शामिल हैं, को हिरासत में लिया गया है। इन लोगों पर बैरिकेड्स तोड़ने और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई करने का आरोप है।
लगातार हो रही हिंसा, आगजनी और संपत्ति के नुकसान को देखते हुए प्रशासन ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है। पुलिस अब प्रदर्शनों के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों पर विचार कर रही है। साथ ही, पुलिस ने पत्रकारों के लिए वैध पहचान पत्र दिखाने की एडवाइजरी जारी की है और युवाओं (Gen-Z) को चेतावनी दी है कि अवैध प्रदर्शनों में शामिल होने के गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।