तबादलों से नाराजगी: 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे जवान

दो अधिकारियों के विवादास्पद तबादलों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कर्मी 2 नवंबर को PHQ के बाहर प्रदर्शन करेंगे।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
तबादलों से नाराजगी: 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे जवान

दिल्ली पुलिस के भीतर इस समय काफी तनाव देखा जा रहा है। दो वरिष्ठ अधिकारियों के विवादास्पद तबादलों के बाद पुलिस कर्मियों में भारी आक्रोश है, जिसके चलते अब उन्होंने 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब गांधी नगर सब-डिवीजन की एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ अरुण कुमार को अचानक उनके पदों से हटा दिया गया।

दरअसल, यह कार्रवाई जिला अदालत के वकीलों द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद की गई है। वकीलों का आरोप है कि 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में एक अधिवक्ता के साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, वकीलों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि मामले के आरोपी को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया और एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें लोड रिवॉल्वर दिखाकर धमकाया। इसी दबाव के चलते पुलिस प्रशासन ने इन अधिकारियों का तबादला कर दिया, जिससे अब पुलिस कर्मियों के बीच असंतोष फैल गया है।

विभाग में बढ़ता तनाव और सुरक्षा इंतजाम

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इस विरोध प्रदर्शन की तैयारी आंतरिक व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए की जा रही है। खबर मिलते ही दिल्ली पुलिस नेतृत्व अलर्ट मोड पर है और सभी जिला डीसीपी व यूनिट हेड को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्टाफ को इस प्रदर्शन में शामिल होने से रोकें। वहीं, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें वे अपने सहयोगियों का आभार व्यक्त करते नजर आ रहे हैं।

एक तरफ जहां आंतरिक कलह जारी है, वहीं राजधानी की सुरक्षा को लेकर भी कड़े इंतजाम हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 270 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) कंपनियों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ा दी है, ताकि इंडिया गठबंधन की रैली और अन्य संभावित प्रदर्शनों को नियंत्रित किया जा सके। इन सुरक्षा इंतजामों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी लंबित है।

पुलिस कर्मियों के गिरते मनोबल की एक झलक सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार समिति की रिपोर्ट में भी दिखी है। जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों की जांच कर रही इस कमेटी ने पाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों की तुलना में पुलिस अधिकारियों ने लक्षित हमलों को लेकर कहीं अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं।

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