डिजिटल अरेस्ट स्कैम: दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी, 5 राज्यों में 1.53 करोड़ की ठगी रोकी

आजकल साइबर अपराधी लोगों को डराने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं, जिनमें 'डिजिटल अरेस्ट' सबसे खतरनाक साबित हो रहा है। दिल्ली पुलिस की फाइनेंशियल मॉनिटरिंग सेल (FMC) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 5 अलग-अलग राज्यों में चल रहे ऐसे ही एक बड़े खेल को नाकाम किया है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से करीब 1.53 करोड़ रुपये की संभावित वित्तीय हानि को होने से रोक लिया गया है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कुछ शिकायतें दर्ज हुईं। इसके बाद IFSO यूनिट के तहत काम कर रही 'प्रोएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम' ने संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर नजर रखी। पुलिस ने उन पीड़ितों की पहचान की जिन्हें जालसाजों ने अपने दबाव में ले रखा था और समय रहते हस्तक्षेप कर उनकी रकम को बचने में मदद की।
ऐसे जाल में फंसाते हैं साइबर ठग
ठगों का तरीका बेहद शातिर था। वे खुद को TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) के अधिकारी या IPS ऑफिसर बताकर कॉल करते थे। पीड़ितों को डराया जाता था कि उनके आधार कार्ड या सिम कार्ड का इस्तेमाल कनाडा जैसे देशों में मनी लॉन्ड्रिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया है। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया जाता था और धमकी दी जाती थी कि अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
इस डर के कारण लोग बैंक ऑफ बड़ौदा, ICICI बैंक और SBI जैसे खातों से पैसे निकालकर ठगों के बताए 'म्यूल अकाउंट्स' में भेजने लगते हैं। पुलिस ने इस मामले में कई गंभीर उदाहरण साझा किए हैं:
- दिल्ली के सागरपुर में एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को निशाना बनाया गया था।
- नजफगढ़ के एक 77 वर्षीय रिटायर्ड एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया कर्मचारी को 17 सितंबर से डिजिटल अरेस्ट में रखा गया था और उनसे 3 लाख रुपये अतिरिक्त लेने के लिए सोना-चांदी गिरवी रखने का दबाव बनाया जा रहा था।
- राजस्थान के एक 80 वर्षीय कपड़ा व्यापारी, जो पहले ही 18 लाख रुपये गंवा चुके थे, उन्हें अपना घर गिरवी रखने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिसे पुलिस ने समय रहते रोक लिया।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या कानून प्रवर्तन संस्था वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पैसों की मांग करती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर दें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।