डिजिटल अरेस्ट स्कैम: दिल्ली पुलिस ने 5 राज्यों में रोकी 1.53 करोड़ की बड़ी ठगी

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड के जरिए हो रही करीब 1.53 करोड़ रुपये की ठगी को समय रहते रोक लिया है। यह पूरा मामला पांच अलग-अलग राज्यों से जुड़ा था, जहां जालसाजों ने लोगों को डराने के लिए सरकारी अधिकारियों का मुखौटा पहना था।
पुलिस की फाइनेंशियल मॉनिटरिंग सेल की टीम ने पाया कि अपराधी खुद को TRAI, CBI, ED और IPS अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बना रहे थे। 21 से 29 सितंबर के बीच यह पैटर्न सामने आया, जिसमें पीड़ितों को डरा-धमकाकर उनके पैसे हैदराबाद के एक ही 'म्यूल अकाउंट' में ट्रांसफर करवाए जा रहे थे। नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर मिली शिकायतों के बाद पुलिस ने इस पूरे खेल को नाकाम कर दिया।
इन पीड़ितों को बचाया गया
इस ऑपरेशन के दौरान दिल्ली के नजफगढ़ के एक 77 वर्षीय रिटायर्ड एयरपोर्ट अथॉरिटी कर्मचारी के 25 लाख रुपये रिकवर किए गए। वहीं, राजस्थान के एक 80 वर्षीय कपड़े के व्यापारी को 10 लाख रुपये की और ठगी होने से बचाया गया, हालांकि वह पहले ही 18 लाख रुपये गंवा चुके थे। इसके अलावा गुजरात के एक कारोबारी को 1 करोड़ रुपये और निवेश करने से रोककर उन्हें काउंसिल किया गया। पुलिस ने महाराष्ट्र में 55 लाख, गुजरात में 75 लाख, उत्तर प्रदेश में 10 लाख और दिल्ली में 3.48 लाख रुपये की संभावित ठगी को रोका है।
डीसीपी अनयेश रॉय ने स्पष्ट किया कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी अवधारणा नहीं होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर सुरक्षा या वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे की मांग नहीं करता है।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। अगर 'गोल्डन ऑवर' यानी घटना के तुरंत बाद सूचना दी जाए, तो अवैध ट्रांजेक्शन को फ्रीज करना आसान हो जाता है। इसी बीच, हैदराबाद पुलिस ने भी एक अलग मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक रिटायर्ड कर्मचारी और उनकी बेटी से 29.17 लाख रुपये ठगे थे।